‘महाराज’ से किसने लगाई गुहार, किसने दी ‘उपचुनाव बहिष्कार’ की चेतावनी ?

‘महाराज’ से किसने लगाई गुहार, किसने दी ‘उपचुनाव बहिष्कार’ की चेतावनी ?

ग्वालियर, अतुल सक्सेना| गुरुवार को पारिवारिक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने ग्वालियर आये सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) से नियुक्ति के इंतजार में बैठे बेरोजगार शिक्षकों ने मुलाकात की। मुलाकात के दौरान शिक्षकों ने बताया कि पात्रता परीक्षा पास किये हुए उन्हें लंबा समय हो गया लेकिन सरकार नियुक्ति नहीं कर रही। शिक्षकों (Teachers) की बात सुनने के बाद सिंधिया ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे इस विषय में मुख्यमंत्री (Chief minister) से शीघ्र बात करेंगे। उधर शिक्षकों ने कहा कि यदि जल्दी ही नियुक्ति के आदेश नहीं होते तो हम सब उपचुनावों (By-election) का बहिष्कार करेंगे।

मध्यप्रदेश सरकार की शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ग 1 एवं 2 की परीक्षा में उत्तीर्ण होकर चयनित हो चुके शिक्षक अपनी नियुक्ति के इंतजार में परेशान हैं।उन्हें अब अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा है। लगातार आंदोलन करने के बाद भी प्रदेश सरकार उनकी नियुक्ति आदेश नहुँ निकाल रही। प्रदेश में करीब तीन हजार चयनित शिक्षक नियुक्ति के इंतजार में बैठे हैं इनमें से कई तो ओवर एज भी हो चुके हैं। ग्वालियर चंबल संभाग में भी करीब 300 चयनित शिक्षक हैं जिन्हें अपनी नियुक्ति का इंतजार है। आक्रोशित चयनित शिक्षकों ने पिछले तीन दिनों तक शासन का ध्यान आकर्षित करने एवं अविलंब नियुक्तियां प्रदान करने के उद्देश्य से एक बार फिर फूलबाग चौराहे पर धरना भी दिया। यहाँ कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने उनसे मुलाकात कर आश्वासन देकर धरना समाप्त करवा दिया।

शिक्षकों ने “महल” जाकर “महाराज” से की मुलाकात

चयनित शिक्षकों ने गुरुवार को ग्वालियर आये सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से जय विलास पैलेस पहुँच कर मुलाकात की। शिक्षकों के हाथों में बैनर पोस्टर थे जिनपर मार्मिक नारे लिखे थे। “हम हैं परेशान, हम हैं बेरोजगार, आप हैं इस खंड के “महाराज”, दिलवाइये हमें रोजगार, ” शिक्षकों पर अत्याचार, कैसा है ये शिष्टाचार”, “महाराज” बीच की बनायें युक्ति, पड़ोसी प्रदेशों की तरह दें नियुक्ति,। शिक्षकों ने बताया कि उन्हें परीक्षा पास किये हुए बहुत लंबा समय हो गया लेकिन सरकार हमारी नियुक्ति नहीं कर रही। हम चयनित होकर भी बेरोजगार बैठे हैं। हमें हमारा घर चलाना मुश्किल हो रहा है। सिंधिया ने बात सुनने के बाद भरोसा दिलाया कि वे इस विषय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा करेंगे और जल्दी ही कोई हल निकालेंगे। उधर चयनित शिक्षकों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार हमारी मांग पर ध्यान नहीं दे रही । यदि इस बार भी आश्वासन झूठा साबित होता है और शीघ्र हमारी नियुक्ति के आदेश नहीं होते तो हम उपचुनावों का बहिष्कार करेंगे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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