युवा नेता ने ऐसे मनाई राजीव गांधी की पुण्य तिथि, जरूरतमंदों तक पहुंचा एक दिन का न्याय

युवा नेता ने ऐसे मनाई राजीव गांधी की पुण्य तिथि, जरूरतमंदों तक पहुंचा एक दिन का न्याय

ग्वालियर।अतुल सक्सेना|  पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर लॉक डाउन का पालन करते हुए कांग्रेस ने अपने नेता को याद किया और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये। वहीं युवा कांग्रेस ने न्याय योजना के अंतर्गत एक दिन का न्याय गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंचाया।

राजीव गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर ग्वालियर में राहुल गांधी की मंशा अनुरूप युवा कांग्रेस द्वारा एक दिन का न्याय मुहैया कराया गया। न्याय योजना के अंतर्गत राहुल गांधी ने ज़रूरतमंदों को प्रतिदिन 200 रुपये के हिसाब से माह में 6000 रुपये देने का वादा किया था । उसी कड़ी में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव मितेंद्र दर्शन सिंह ने एक दिन का न्याय जरूरतमंदों तक पहुँचाने के लिए 250 आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों को 200 रुपये की आर्थिक मदद मुहैया करवाई । इन परिवारों में मोची , चायवाला , पान वाले , प्रेस करने वाले , टेलर , दिहाड़ी मजदूर , नाई , हलवाई व माला बेचने वाले वे परिवार शामिल थे जो लॉक डाउन के चलते आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। मितेंद्र ने कहा कि युवा कांग्रेस देगी एक दिन का न्याय , छह महीने का न्याय दे केंद्र सरकार। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव मितेंद्र दर्शन सिंह और शहर जिला कांग्रेस के सचिव कुलदीप कौरव सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के पास गए और एक दिन का न्याय मुहैया कराया।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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