मध्य प्रदेश में खेतों में नरवाई जलाने को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त हो गया है। हरदा जिले में एक किसान द्वारा खेत में नरवाई जलाने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस कार्रवाई के बाद किसानों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है कि अब खेतों में पराली या नरवाई जलाने पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन का कहना है कि अब खेतों में लगने वाली आग की निगरानी सैटेलाइट के जरिए की जा रही है। जैसे ही किसी खेत में आग लगने की जानकारी मिलती है, संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। इसके बाद जांच कर संबंधित किसान के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
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नरवाई जलाने पर क्यों हो रही सख्त कार्रवाई
नरवाई जलाने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान होता है। खेतों में बची फसल के अवशेषों को आग लगाने से हवा में धुआं और प्रदूषण बढ़ता है। इससे आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की सेहत पर भी असर पड़ता है।
इसके अलावा नरवाई जलाने से खेत की मिट्टी की उर्वरता भी कम हो जाती है। मिट्टी में मौजूद कई लाभकारी जीवाणु और पोषक तत्व आग की वजह से नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि सरकार और प्रशासन लगातार किसानों को नरवाई न जलाने की सलाह दे रहे हैं।
हरदा में प्रशासन की कार्रवाई से यह साफ संदेश देने की कोशिश की गई है कि अब नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई होगी। प्रशासन का मानना है कि सख्ती के बिना इस समस्या को रोकना मुश्किल है।
सैटेलाइट से हो रही खेतों की निगरानी
अब प्रशासन ने तकनीक का सहारा लेकर नरवाई जलाने की घटनाओं पर नजर रखना शुरू कर दिया है। खेतों में आग लगने की घटनाओं का पता लगाने के लिए सैटेलाइट की मदद ली जा रही है।
सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि किस इलाके में आग लगी है। इसके बाद संबंधित जिले और तहसील के अधिकारियों को सूचना भेजी जाती है। अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करते हैं और दोषी पाए जाने पर किसान पर जुर्माना लगाया जाता है।
इस तकनीक के इस्तेमाल से प्रशासन को निगरानी करने में काफी आसानी हो रही है। पहले कई बार ऐसी घटनाओं की जानकारी देर से मिलती थी, लेकिन अब तुरंत पता चल जाता है।
किसानों के लिए क्या है सरकार की सलाह
सरकार और कृषि विभाग लगातार किसानों से अपील कर रहे हैं कि वे खेतों में नरवाई न जलाएं। इसके बजाय फसल के अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने या अन्य कृषि कार्यों में किया जा सकता है।
कई जिलों में किसानों को इसके लिए मशीनें और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। इन मशीनों की मदद से फसल के अवशेषों को खेत में ही मिलाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान नरवाई जलाने की बजाय इन आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करें तो उन्हें भविष्य में बेहतर उत्पादन भी मिल सकता है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
नरवाई जलाने से मिट्टी को होता है नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नरवाई जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। खेत में आग लगाने से मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जो फसलों के लिए बेहद जरूरी होते हैं।
इसके अलावा मिट्टी की नमी भी कम हो जाती है, जिससे अगली फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि कृषि विभाग लगातार किसानों को नरवाई जलाने से बचने की सलाह देता है। यदि किसान खेत में बचे अवशेषों को मिट्टी में मिलाते हैं तो इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और लंबे समय तक खेत की उत्पादकता बनी रहती है।