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CFSL चंडीगढ़ ने बैलिस्टिक जांच से खोला राज, ऑपरेशन महादेव में जो आतंकी मारे गए वही पहलगाम हमले के अपराधी

Written by:Vijay Choudhary
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यह संस्था भारत की सबसे पुरानी फोरेंसिक लैब में से एक है और गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है।
CFSL चंडीगढ़ ने बैलिस्टिक जांच से खोला राज, ऑपरेशन महादेव में जो आतंकी मारे गए वही पहलगाम हमले के अपराधी

CFSL चंडीगढ़

CFSL चंडीगढ़ ने बैलिस्टिक जांच एक बड़ा राज खोल दिया। इस राज के जरिए देशवासियों के जहन में जो सवाल था, उसके जवाब भी मिल गया। सभी के जहन में था कि जो पहलगाम में आतंकी हमले को वारदात किए थे, क्या वो मारे गए? 28-29 जुलाई को जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन महादेव चला उसी में पहलगाम के आतंकी मारे गए, और इसको कंफर्म किया CFSL चंडीगढ़ ने। अपने जांच में CFSL चंडीगढ़ ने ने कहा कि मारे गए आतंकियों से वहीं राइफलें बरामद हुई हैं, जिनसे पहलगाम में हमला हुआ था। यानी की दोनों राइफलों से चली गोली एक ही है। इससे कंफर्म हो गया कि ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकी ही पहलगाम हमले के दोषी थे, जिनको मार दिया गया।

22 अप्रैल का हमला

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर की बैसारन घाटी (पहलगाम) में एक दिल दहला देने वाला आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। इस हमले के पीछे आतंकियों का मंसूबा था अमरनाथ यात्रा और पर्यटन को नुकसान पहुंचाना। इस भीषण हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन महादेव’ शुरू किया, जो करीब दो महीने चला। 28 जुलाई को तीन आतंकियों जिसमें सुलेमान शाह, हाशिम मूसा और जिब्रान को डाचिगाम के जंगलों में मार गिराया गया। लेकिन सवाल था क्या मारे गए आतंकी वही थे जो 22 अप्रैल के हमले में शामिल थे?

CFSL चंडीगढ़ ने खोला ‘साइंटिफिक’ राज

इस सवाल का जवाब मिला CFSL (Central Forensic Science Laboratory) चंडीगढ़ से। यह संस्था भारत की सबसे पुरानी फोरेंसिक लैब में से एक है और गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। हमले की जगह से बरामद गोलियों के खोखे और बाद में मारे गए आतंकियों के हथियार (एक M-9 अमेरिकन राइफल और दो AK-47) को जांच के लिए भेजा गया। CFSL की बैलिस्टिक टीम ने इन हथियारों की नालियों से नई फायरिंग कर खोखे निकाले और उन्हें पहले से मिले खोखों से मिलाया। परिणाम में आया कि दोनों का सटीक मेल हुआ। यानी जिन हथियारों से मारे गए आतंकियों ने फायरिंग की, वे वही हथियार थे जिनसे बैसारन घाटी में 26 लोगों की हत्या की गई थी।

CFSL अपराध विज्ञान का वैज्ञानिक स्तंभ

CFSL चंडीगढ़ की स्थापना 1975 में हुई थी। यह देश की पहली केंद्रीय फोरेंसिक लैब थी जिसका उद्देश्य अपराध जांच को वैज्ञानिक आधार देना था। CFSL की विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं, जिसमें बैलिस्टिक जांच के जरिए हथियारों, गोली और खोखे का मिलान होता है, DNA जांच के अंतर्गत अपराधियों की पहचान की जाती है। इसके अलावा हस्तलेख और जाली दस्तावेज जांच, ड्रग्स और केमिकल एनालिसिस, साइबर फोरेंसिक और डिजिटल सबूत की जांच, विस्फोटक और बम जांच होती है। इस संस्थान की जांच रिपोर्टें CBI, NIA, पुलिस और कोर्ट में अहम सबूत होती हैं। हालांकि इसमें ट्रेनिंग सिर्फ योग्य छात्रों को दी जाती है, जिनका नामांकन इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ होता है।