हरियाणा के छछरौली कस्बे के निवासियों का 139 साल लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। एक ऐतिहासिक फैसले में, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा के पटल से घोषणा की कि कस्बे के लोगों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद उन सैकड़ों परिवारों के लिए अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने का रास्ता खुल गया है, जो पीढ़ियों से वहां रह रहे थे लेकिन कानूनी तौर पर अपनी जमीन के मालिक नहीं थे।
यह फैसला छछरौली के लिए एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं पैदा होंगी। कई पीढ़ियों से यहां बसे होने के बावजूद, जमीन तकनीकी रूप से प्रदेश सरकार के नाम पर दर्ज थी, जिससे एक बड़ी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई थी।
क्या थी 139 साल पुरानी समस्या?
छछरौली कस्बे में एक बड़ी आबादी ऐसी भूमि पर बसी हुई थी, जिसका मालिकाना हक हरियाणा सरकार के पास था। इसके चलते स्थानीय निवासी अपने ही घरों और जमीनों के कानूनी मालिक नहीं बन पा रहे थे। उन्हें अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने, बैंक से लोन लेने या संपत्ति को कानूनी रूप से किसी और को हस्तांतरित करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
यह समस्या साल 2020 के बाद और भी गंभीर हो गई जब रजिस्ट्री का काम पूरी तरह से ठप हो गया था। इस वजह से लोगों के कई जरूरी काम, जैसे घर का निर्माण या वित्तीय जरूरतें, अटके हुए थे।
पूर्व मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने उठाई थी आवाज
इस पुरानी और गंभीर समस्या को पूर्व मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष प्रमुखता से उठाया। कंवरपाल गुर्जर ने बताया कि यह क्षेत्र की एक बहुत बड़ी और जटिल समस्या थी। उन्होंने सरकार के संज्ञान में इस मामले को लाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसी पहल का नतीजा है कि आज यह ऐतिहासिक फैसला संभव हो पाया है।
स्थानीय लोगों में खुशी की लहर
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद छछरौली के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। स्थानीय निवासियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री और पूर्व मंत्री का आभार व्यक्त किया है।
“इस निर्णय से कस्बे की लगभग आधी आबादी को सीधा फायदा होगा। जमीन पर सरकार का अधिकार होने से हम कानूनी रूप से मालिक नहीं थे, लेकिन अब वर्षों पुरानी अनिश्चितता समाप्त हो गई है।” — कपिल मनीष गर्ग, स्थानीय निवासी
अन्य निवासियों अंकुर कुमार और लक्ष्मण दास ने भी इस फैसले को छछरौली के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण बताया। लोगों का मानना है कि इससे न केवल उनकी संपत्ति को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक प्रक्रिया पर हैं ताकि इस फैसले को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके और लोगों को रजिस्ट्री का लाभ मिलना शुरू हो।






