एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद के लिए सी.पी. राधाकृष्णन का नाम घोषित कर दिया है। इस ऐलान के बाद हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने इसे एक “मजबूत और संतुलित फैसला” करार दिया। अंबाला में पत्रकारों से बातचीत में विज ने कहा कि- “राधाकृष्णन ने अब तक अपनी जिम्मेदारियों का बहुत कुशलता से निर्वहन किया है। बीजेपी ने दक्षिण भारत से उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए उतारकर राजनीतिक संतुलन को और मज़बूती दी है। उनका अनुभव और समर्पण एनडीए की एकता को नई ऊर्जा देगा।” हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने सी.पी. राधाकृष्णन को एनडीए का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले को मजबूत कदम बताया है.
बीजेपी का दक्षिण भारत पर फोकस
बीजेपी संसदीय बोर्ड ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद यह नाम तय किया। बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राधाकृष्णन को “अनुभवी और समर्पित नेता” बताते हुए कहा कि उनका योगदान देश की राजनीति और संगठन को मजबूती देने में अहम रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बीजेपी का यह कदम दक्षिण भारत में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
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लंबा प्रशासनिक अनुभव और सक्रिय राजनीतिक करियर
सी.पी. राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में हुआ। शुरुआती दौर में वे आरएसएस से जुड़े और 1970 के दशक में जनसंघ की राज्य कार्यकारी समिति का हिस्सा बने। 1998 और 1999 में वे कोयंबटूर से सांसद चुने गए और संसद की विभिन्न समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई। 18 फरवरी 2023 से 30 जुलाई 2024 तक वे झारखंड के राज्यपाल रहे। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया और साथ ही तेलंगाना व पुदुचेरी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। राजनीति के साथ-साथ वे खेलों में भी सक्रिय रहे हैं। कॉलेज के दिनों में वे टेबल टेनिस चैंपियन और लंबी दूरी के धावक रहे। क्रिकेट और वॉलीबॉल में भी उन्हें खास रुचि रही है।
9 सितंबर को होगा चुनाव
उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर को होगा। नामांकन की आखिरी तारीख 21 अगस्त और जांच 22 अगस्त को होगी। पिछले महीने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह चुनाव कराया जा रहा है। एनडीए ने अपना उम्मीद्वार घोषित कर दिया है अब देखना होगा कि विपक्ष की ओर से किसे उम्मीद्वार बनाया जाता है। ज्ञात रहे कि अचानक से उपराष्ट्रपति धनखड़ ने अपने पद से त्यागपत्र दे दी, उसके बाद राष्ट्रपति द्वारा उनका त्यागपत्र स्वीकार भी कर लिया गया। उसके बाद पूरे देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज गई थी, लेकिन अभी तक जगदीप धनखड़ ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।