पूर्व मंत्री और उनके परिजनों को धोखाधड़ी के मामले में राहत नहीं, हाईकोर्ट ने किया इनकार

पूर्व मंत्री और उनके परिजनों को धोखाधड़ी के मामले में राहत नहीं, हाईकोर्ट ने किया इनकार

हरियाणा के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सुभाष चंद चौधरी समेत उनके परिजनों और सहयोगियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने लोन धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामले को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना है कि इस तरह के मामलों में एफआईआर रद्द करना न्याय व्यवस्था के खिलाफ होगा और इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा।

पूर्व मंत्री समेत कई लोगों पर आरोप

जगाधरी से दो बार विधायक रह चुके और 1996 में मंत्री रहे सुभाष चौधरी पर उनकी पत्नी कुसुम रानी, भाई अशोक कुमार और राजनीतिक सलाहकार दीप चंद के साथ मिलकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। वर्ष 2018 में यमुनानगर के थाना बुडिया में दर्ज एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश रचने की धाराएं लगाई गई थीं। आरोप है कि इन्होंने मिलकर जाली दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर 71 लाख रुपये का कृषि लोन लिया।

फर्जी कागजात से लोन लेने का आरोप

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने बंजर भूमि को उपजाऊ दिखाने के लिए फर्जी जमाबंदी और गिरदावरी तैयार की। यही नहीं, लोन वापस न करने के लिए जमीन को बाढ़ग्रस्त बताने का झूठा दावा भी किया गया। जांच के बाद सरकार ने 16 मार्च 2021 को चार्जशीट दाखिल कर दी थी। वहीं, ट्रायल कोर्ट ने 8 जून 2021 को सभी आरोपियों पर आरोप तय कर दिए थे। इस दौरान आरोपियों ने एफआईआर रद्द करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

जस्टिस त्रिभुवन दहिया की कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह के मामलों में एफआईआर रद्द करने से न्याय व्यवस्था की जड़ें कमजोर होंगी। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोपी ने लोन चुका भी दिया है तो इसका यह मतलब नहीं कि दर्ज आपराधिक मामले को खत्म कर दिया जाए। ऐसे गंभीर मामलों में कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। इस आदेश के बाद सुभाष चौधरी और उनके परिजनों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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