रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने अपनी सियासी चाल से एक बड़े संकट को टाल दिया है। दरअसल पार्टी से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरीं पूर्व चेयरपर्सन शकुंतला भांडोरिया ने आखिरकार पार्टी के सामने हथियार डाल दिए हैं। अब वह कांग्रेस प्रत्याशी नेहारिका सिंह के लिए प्रचार करेंगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब 10 मई को वोटिंग से पहले कांग्रेस के लिए हर एक सीट पर जीत बेहद अहम मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस समझौते को कांग्रेस की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने न केवल एक मजबूत बागी को अपने पाले में किया, बल्कि चुनाव से ठीक पहले संगठन में एकजुटता का संदेश भी दिया।
दरअसल कांग्रेस की मजबूरी बन गई थी कि रेवाड़ी में जीत हासिल करने के लिए उसे हर बागी को मनाना था। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव ने खुद मोर्चा संभाला। वे सीधे शकुंतला भांडोरिया के घर पहुंचे और उन्हें हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) का मेंबर बनाने का नियुक्ति पत्र पढ़कर सुनाया। कैप्टन यादव ने स्पष्ट किया कि यदि भांडोरिया मैदान में डटी रहतीं तो कांग्रेस को इसका सीधा नुकसान होता और विरोधी खेमे को इसका लाभ मिलता। इस समझौते के बाद, उन्हें तत्काल पीसीसी मेंबर बनाया गया है और भविष्य में पार्टी में और बड़ा पद देने का आश्वासन भी दिया गया है। फिलहाल, रेवाड़ी में चिरंजीव राव ग्रामीण और प्रशांत की जगह शकुंतला को शहरी पीसीसी डेलीगेट बनाया गया है, साथ ही यह भी कहा गया है कि नई कार्यकारिणी में उन्हें महासचिव जैसा महत्वपूर्ण पद दिया जाएगा। विधानसभा चुनाव में भी उनके मान-सम्मान का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
क्या बोले कैप्टन अजय यादव?
कैप्टन अजय यादव ने इस सियासी उलटफेर पर अपनी बात रखते हुए कहा कि शकुंतला भांडोरिया ने एक समर्पित कार्यकर्ता होने का परिचय देते हुए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वह पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम करेंगी और कांग्रेस प्रत्याशी के लिए प्रचार करेंगी। कैप्टन ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने तो अपना भ्रष्टाचार छुपाने के लिए अपनी चेयरमैन को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था, जबकि कांग्रेस ने शकुंतला का इंतजार किया और उन्हें पार्टी से बाहर नहीं निकाला। उन्होंने कहा कि यह निर्णय शकुंतला के लिए कठिन था, और इससे कार्यकर्ता मायूस भी हुए होंगे, लेकिन उन्होंने पार्टी हित में यह बड़ा फैसला लिया है। कैप्टन ने यह भी बताया कि उन्होंने स्वयं, राव नरेंद्र सिंह और बीके हरिप्रसाद ने मिलकर शकुंतला से अनुरोध किया था। अंत में वही हुआ जो पार्टी चाहती थी, जिससे रेवाड़ी के विकास और सांप्रदायिक ताकतों को हराने में कांग्रेस को बल मिलेगा।
अजय यादव को राजनीतिक गुरु बताया
शकुंतला भांडोरिया ने भी अपनी नाराजगी को किनारे रखते हुए कैप्टन अजय यादव को अपना नेता और राजनीतिक गुरु बताया। उन्होंने कहा, “कैप्टन साहब मेरे नेता हैं, चाहे मैं नाराज रही हूं, लेकिन मेरी एक ही बात रही है।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कैप्टन से मिलेंगी, तो उन्होंने कहा था कि हर मोड़ पर मिलूंगी, जरूरत पड़ी तो आशीर्वाद भी लूंगी। उनकी यह बात कांग्रेस के भीतर की व्यक्तिगत वफादारी और राजनीतिक समीकरणों को बखूबी दर्शाती है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
यह भी गौरतलब है कि शकुंतला भांडोरिया कांग्रेस सरकार के दौरान रेवाड़ी नगर परिषद की चेयरपर्सन रह चुकी हैं। बाद में भाजपा की सरकार आने पर उन्हें हटाकर विनीता पीपल को चेयरपर्सन बनाया गया था। इस बार विनीता भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि कांग्रेस ने नेहारिका को प्रत्याशी बनाया है। भांडोरिया ने कांग्रेस से टिकट मांगा था, लेकिन टिकट न मिलने पर नाराज होकर निर्दलीय नामांकन भर दिया था और प्रचार में भी जुट गई थीं। उनकी इस बगावत को शांत करने के लिए कांग्रेस के भीतर से लगातार प्रयास जारी थे। पूर्व विधायक चिरंजीव राव ने भी स्वीकार किया था कि टिकट वितरण के बाद ऐसी नाराजगी आम बात है।






