रॉबर्ट वाड्रा को धनशोधन मामले में समन, 28 अगस्त को कोर्ट में पेश होने के आदेश

ईडी ने इस मामले में 17 जुलाई को आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें वाड्रा समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
रॉबर्ट वाड्रा

रॉबर्ट वाड्रा

कांग्रेस नेता और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने वाड्रा को समन भेजा। अदालत ने वाड्रा को 28 अगस्त 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में जमीन सौदे से जुड़ा हुआ है। विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोट्रा की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली तारीख पर ईडी द्वारा दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से पहले सुनवाई की जाएगी। ईडी ने इस मामले में 17 जुलाई को आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें वाड्रा समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

वाड्रा को 42 करोड़ रुपये का लाभ

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह मामला वर्ष 2008 में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ा है। ईडी की जांच में यह सामने आया है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी मेसर्स स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में साढ़े तीन एकड़ जमीन मात्र 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। यह जमीन उन्होंने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से खरीदी थी। ईडी का दावा है कि जमीन का मालिकाना हक महज 24 घंटे में वाड्रा की कंपनी के नाम हो गया था। बाद में, वर्ष 2012 में स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी ने वही जमीन DLF को 58 करोड़ रुपये में बेच दी, जिससे कंपनी को सीधे तौर पर 42.62 करोड़ रुपये का लाभ हुआ।

कंपनी की 43 संपत्तियां जब्त

प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में दावा किया है कि वाड्रा और उनकी कंपनी की 43 अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है, जिनकी अनुमानित कीमत 37 करोड़ 64 लाख रुपये बताई गई है। इन संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जब्त किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं। ईडी के अनुसार, इस लेनदेन में नियमों का उल्लंघन हुआ है और सौदे के पीछे असामान्य वित्तीय गतिविधियां सामने आई हैं, जिनका सीधा संबंध अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों से है।

आरोपियों में रॉबर्ट वाड्रा के साथ 10 अन्य

ईडी द्वारा दाखिल आरोपपत्र में रॉबर्ट वाड्रा के अलावा 10 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। इनमें से अधिकांश का सीधा संबंध स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी और अन्य संबंधित कंपनियों से है। ईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस पूरे सौदे की जांच से स्पष्ट होता है कि जानबूझकर जमीन की कीमत कम दिखाई गई और बाद में उसे ऊंची कीमत पर बेचकर अवैध लाभ कमाया गया। अगली सुनवाई अदालत की 28 अगस्त 2025 को तय की है। उसी दिन यह निर्णय लिया जाएगा कि ईडी के आरोपपत्र पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। अगर कोर्ट आरोपपत्र पर संज्ञान लेती है, तो वाड्रा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया और तेज हो सकती है। ये मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश की राजनीति में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दे पहले से ही गर्म हैं। वाड्रा पर लगे आरोप राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गए हैं। अब सभी की निगाहें 28 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो रॉबर्ट वाड्रा की आगे की कानूनी स्थिति को तय करेगी।

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