हरियाणा के सोनीपत में प्रशासन और एक किसान परिवार के बीच विवाद ने नाटकीय मोड़ ले लिया है। असावरपुर गांव का 48 वर्षीय किसान सुनील मंगलवार दोपहर से 250 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़कर अनशन कर रहा है। करीब 18 घंटे से ज्यादा समय से वह टावर पर ही डटा हुआ है और जमीन के बदले जमीन की अपनी मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है।

किसान ने टावर से कूदकर जान देने की धमकी दी है, जिससे मौके पर हड़कंप मचा हुआ है। उसने मंगलवार दोपहर से कुछ भी खाया-पिया नहीं है। वह अपने साथ मोबाइल फोन लेकर गया था, लेकिन अब वह भी बंद हो चुका है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और उसे नीचे उतारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं है।

क्यों हो रहा है यह विरोध प्रदर्शन?

यह पूरा विवाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की एक कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ। दरअसल, HSVP की टीम मंगलवार को नेशनल हाईवे-44 के पास अवैध कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर लेकर पहुंची थी। टीम को देखते ही किसान सुनील विरोध जताते हुए पास के मोबाइल टावर पर चढ़ गया। जिस जमीन पर कार्रवाई हो रही थी, उस पर किसान का घर और एक स्कूल बना हुआ है।

परिवार का दावा है कि वे 1962 से इस जमीन पर रह रहे हैं और यह उनकी पुश्तैनी संपत्ति है। वहीं, प्रशासन इस जमीन को सरकारी बता रहा है। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने बीआर जेड नामक स्कूल के एक कमरे को तोड़ दिया, जिसमें करीब 150 बच्चे पढ़ते हैं। इसके बाद तनाव और बढ़ गया।

आत्मदाह की चेतावनी और धरने का ऐलान

जमीन पर मौजूद किसान के परिवार और स्कूल संचालक ने चेतावनी दी है कि अगर उनका पूरा मकान और स्कूल तोड़ा गया तो वे आत्मदाह कर लेंगे। इस चेतावनी के बाद प्रशासन ने कार्रवाई रोक दी है। वहीं, घटना के बाद गांव में बैठक हुई और ग्रामीणों ने किसान सुनील के समर्थन में धरना देने का फैसला किया है। सुनील के घर के बाहर टेंट लगाकर आंदोलन शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

क्या है पूरा जमीन विवाद?

HSVP के अधिकारी सिद्धार्थ के अनुसार, यह जमीन 2 मार्च 2006 को 60 मीटर चौड़ी सड़क के प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके बाद से ही यह मामला कोर्ट में था।

“जमीन मालिक ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन हर बार उनकी याचिका खारिज हो गई। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह कार्रवाई की जा रही है।” — सिद्धार्थ, अधिकारी, HSVP

अधिकारियों का कहना है कि अगर परिवार मुआवजा लेना चाहता है, तो उन्हें 2006 के तय रेट के अनुसार करीब 12.50 लाख रुपये प्रति एकड़ का भुगतान किया जा सकता है। लेकिन ग्रामीण मौजूदा बाजार दर के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जो उनके अनुसार करीब एक लाख रुपये प्रति गज है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 150 मकानों ने पुराना मुआवजा नहीं लिया है क्योंकि यह अन्यायपूर्ण है।