
रूस-यूक्रेन सीमा पर फंसे दो युवकों अंकित जांगड़ा और विजय कुमार का तीन दिन से अपने परिवार से संपर्क नहीं हो पा रहा है। दोनों के परिजन बेचैनी में दिन-रात उनका इंतजार कर रहे हैं। अंकित की मां सुशीला रो-रोकर कह रही हैं, “जे सरकार म्हारी सुनाई करे तो हमारा बच्चा वापस आ जै।” उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री मोदी मदद करेंगे और उनके बेटे सुरक्षित लौट आएंगे। पूरे गांव में चिंता का माहौल है। परिवार फोन पर संपर्क कर रहा है, लेकिन नेटवर्क की समस्या के चलते कोई खबर नहीं मिल रही है।
युद्ध क्षेत्र से मदद की पुकार
अंकित और विजय ने अंतिम बार अपने परिवारों से संदेश के जरिए मदद मांगी थी। अंकित ने अपने भाई रघुबीर को वॉइस मैसेज भेजा कि सुबह 5 बजे उन्हें युद्ध क्षेत्र में ले जाया जाएगा। वहीं, विजय ने अपने भाई सुनील को संदेश भेजा। दोनों सोशल मीडिया एप डिलीट कर दिए जाने के बाद वीडियो कॉल के जरिए संपर्क कर रहे थे। वीडियो में वे सेना की वर्दी में दिखाई दिए। परिवार मदद की गुहार कर रहा है। दोनों के सोशल मीडिया अकाउंट पहले ही हटाए जा चुके थे, जिससे परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
कर्ज लेकर विदेश भेजा था बेटा
अंकित के भाई रघुबीर ने बताया कि उनके पिता राजमिस्त्री हैं और उन्होंने पाँच लाख रुपये कर्ज लेकर अंकित को विदेश भेजा था। उम्मीद थी कि बेटा पैसे कमाकर घर का निर्माण पूरा करेगा। लेकिन अब घर अधूरा है और परिवार चिंतित है। वहीं, विजय का भाई सुनील बताता है कि विजय सीएससी चलाता था और जून में रूस गया था। पहले भी गांव के कुछ युवक रूस जा चुके हैं। अब दोनों फंसे हुए हैं और परिजनों के पास कोई मदद नहीं है। गांव में हर कोई उनके सुरक्षित लौटने की दुआ कर रहा है।
सरकार से मदद की गुहार
अंकित और विजय के परिजन अब सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। रघुबीर ने बताया कि वह मुख्यमंत्री से दो बार मिल चुके हैं और उन्हें स्टडी वीजा पर जाने की बात बताई है। उन्होंने कहा कि बच्चों की गलती है कि वे लालच में आ गए, लेकिन अब उनकी सुरक्षा पूरी तरह सरकार के हाथ में है। वे प्रधानमंत्री से प्रार्थना कर रहे हैं कि उन्हें वहां से बचाया जाए। इसके लिए वे विदेश मंत्रालय और एंबेसी तक जा चुके हैं। परिवार की आशा है कि जल्दी ही दोनों सुरक्षित घर लौटेंगे।
