हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के निवासी और निस्वार्थ सेवा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेद प्रकाश गोयल ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। 69 वर्षीय गोयल का मानना है कि भले ही वह जीत की दौड़ में न हों, लेकिन चुनाव लड़कर वे आम जनता की आवाज़ को मंच तक पहुंचाना चाहते हैं। इससे पहले वे लोकसभा और राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ चुके हैं। उन्होंने 21 अगस्त को दिल्ली में नामांकन दाखिल किया और दावा किया कि उन्हें 20 सांसदों का समर्थन और अनुमोदन प्राप्त है।
पहले भी लड़ चुके हैं कई चुनाव
वेद प्रकाश गोयल का चुनावी अनुभव काफी लंबा है। वे इससे पहले दो बार राष्ट्रपति चुनाव में भाग ले चुके हैं। इसके अलावा वे लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी किस्मत आजमा चुके हैं।
लोकसभा चुनावों में भागीदारी:
- 2014 में भिवानी-महेंद्रगढ़ से चुनाव लड़कर 2000 वोट
- 2019 में 1900 वोट
- 2024 में 1998 वोट मिले
विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन:
- 2014 में 350 वोट
- 2019 में 650 वोट
- 2024 में 298 वोट हासिल किए
गोयल ने कहा कि भले ही वोटों की संख्या कम रही हो, लेकिन उन्होंने हमेशा समाजहित के मुद्दे उठाने का प्रयास किया है।
सामाजिक कार्यों से बनी पहचान
वेद प्रकाश गोयल केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। वे गरीबों की निस्वार्थ सेवा करते हैं और अब तक कई निर्धन परिवारों की बेटियों की शादियां करवा चुके हैं। उनका कहना है कि उनके लिए राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि पद प्राप्त करने का रास्ता। वे किसानों को 24 घंटे बिजली, फसलों के उचित दाम और युवाओं को रोजगार दिलाने को प्राथमिकता देते हैं।
परिवार और शिक्षा
वेद प्रकाश गोयल के पिता बृजमोहन गोयल स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। गोयल खुद केवल पांचवीं कक्षा तक ही शिक्षित हैं, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक अनुभव से वे खुद को एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक मानते हैं। उनके परिवार में चार बच्चे हैं—तीन बेटियां और एक बेटा, सभी शादीशुदा हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ने का मकसद
गोयल का कहना है कि उन्हें पता है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत आसान नहीं है, लेकिन उनका उद्देश्य केवल पद नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को सामने लाना है। वे मानते हैं कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार है और इस चुनाव के जरिए वे किसान, मजदूर और आम आदमी के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच तक ले जाना चाहते हैं। उन्होंने एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने की बात भी कही है, लेकिन साथ ही ये स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी दल के खिलाफ नहीं बल्कि समाज के हक़ में आवाज़ उठाना है।





