बिलहरा बालक छात्रावास में एक सराहनीय पहल, लेकिन सहयोग का है अभाव

बिलहरा बालक छात्रावास में एक सराहनीय पहल, लेकिन सहयोग का है अभाव

सागर | विनोद जैन

सागर जिले की सुरखी विधान सभा क्षेत्र के बिलहरा ग्राम में स्थित बालक छात्रावास आश्रम में एक अच्छी पहल की शुरुआत हुई | जिसमें शासकीय आयुष औषधालय के चिकित्सक डा. देवेन्द्र ठाकुर ने छात्रावास अधीक्षक बी पी सोनी के सामने छात्रावास में वृक्षारोपण करने का प्रस्ताव रखकर अनुमति मांगी | जिसे बी पी सोनी ने सहर्ष स्वीकार किया और सभी ने वृक्षारोपण कर 16 औषधीय और फल वाले पौधे जिनमें मुनग कदम्ब करंज अर्जुन बेल नीम मीठी नीम जामुन आंवला कटहल कचनार अशोक आम अमरुद बादाम आदि लगा दिये | इसमें खास बात यह है कि छात्रावास में पानी के लिये बोरवेल भी है | जिससे सिंचाई होने से वृक्षों के बढने और फलने फूलने के की काफी उम्मीद है लेकिन खतरा छात्रावास में रह रहे बच्चों से हैं क्योंकि खेल खेल और शरारत में बच्चे इन पौधौं को नष्ट कर देते हैं | छात्रावास में बाउंड्रीवाल तो है जिससे बाहरियों और जानवरों से खतरा तो नहीं है लेकिन अंदर अपनों से ही खतरा बना हुआ है इसका कारण है ट्री गार्ड की कमी क्योंकि छात्रावास के पास इस तरह के काम के लिये कोई अलग से मद भी नही है |

परिवहन मंत्री से है मदद की उम्मीद
चूंकि राजा बिलहरा सुरखी विधानसभा क्षेत्र का गांव है जिसके विधायक हैं | प्रदेश के राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत अगर वह चाहें तो इस नेक और सराहनीय पहल में मदद कर सकते हैं | जो उनके लिये मामूली सा काम है और उनके एक फोन से ट्री गार्ड की व्यवस्था हो सकती है सोचनीय बात है कि एक तरफ जहां वास्तव में मन लगाकर पेडों को संरक्षित करने वालों के पास साधन की कमी है वहीं वन विभाग के पास लाखों ट्री गार्ड हैं जो कबाड में पडे जंग खा रहे हैं|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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