ए के एस यूनिवर्सिटी फिर सुर्खियों में, आईसीएआर मान्यता को लेकर छात्रों का हंगामा

ए के एस यूनिवर्सिटी फिर सुर्खियों में, आईसीएआर मान्यता को लेकर छात्रों का हंगामा

सतना/ पुष्पेन्द्र सिंह बघेल. सतना जिला की ए के एस(AKS) यूनिवर्सिटी(UNIVERSITY) एक बार फिर से सुर्खियों में है। मामला यूनिवर्सिटी की मान्यता को लेकर है। दरअसल यूनिवर्सिटी के बी टेक एग्रीकल्चर के छात्रों ने यूनिवर्सिटी के गेट पर आज जमकर हंगामा किया। छात्रों का कहना है कि बी टेक एग्रीकल्चर की आईसीएआर से मान्यता नहीं होने की वजह से उनका भविष्य चौपट हो रहा है। कॉलेज की मान्यता ना होने पर पढ़कर निकले छात्र दर-दर भटक रहे हैं ना कोई उन्हें नौकरी दे रहा है ना ही कहीं उन्हें एमएससी(M.Sc) एग्रीकल्चर में दाखिला मिल रहा है।

जानते हैं पूरा मामला

दरअसल, सतना जिले की ए के एस यूनिवर्सिटी में बीटेक(B.Tech) एग्रीकल्चर(Agriculture) की आईसीएआर से मान्यता नहीं होने की वजह से वहां के छात्र काफी परेशान हैं। इसको लेकर पहले भी उन्होंने प्रबंधन से बात की थी। जिसमें यूनिवर्सिटी के चेयरमैन द्वारा पहले भी आईसीएआर से मान्यता पर जल्द निराकरण की बात कही गई थी किन्तु लगातार पिछले 2 वर्षों से मान्यता को लॉलीपॉप दे कर यूनिवर्सिटी के प्रबंधक छात्रों से मोटी रकम वसूल रहे हैं।

परीक्षा के दौरान हंगामा

इसी सिलसिले में आज आक्रोशित छात्रों ने परीक्षा के दौरान ही गेट पर धरना दे दिया। छात्रों के आक्रोश को देखते हुए प्रबंधन ने पुलिस की मदद ली। लिहाजा मौके पर सिविल लाइन थाना पुलिस बल सहित कोतवाली थाना के पुलिस पर पहुंचे किन्तु छात्र अपनी आवाज बुलंद किए हुए थे। घंटों के मान- मिन्नत के बाद मामला शांत हुआ। वहीं इस पूरे मामले में कॉलेज प्रशासन की चुप्पी मान्यता पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

गौरतलब हो कि मान्यता को लेकर छात्र और चेयरमैन के बीच पहले भी नोकझोंक हो चुकी है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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