जनता-कर्फ्यू की अपील पर कांग्रेस नेत्री के पीएम के लिए किये FB पर विवादित पोस्ट

जनता-कर्फ्यू की अपील पर कांग्रेस नेत्री के पीएम के लिए किये FB पर विवादित पोस्ट

ग्वालियर/अतुल सक्सेना। देश के लोगों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक दिन जनता-कर्फ्यू की अपील की है, लेकिन पीएम की इस अपील की कांग्रेस नेत्री ने खिल्ली उड़ाई है और अपने फेसबुक पेज पर आपत्तिजनक पोस्ट की हैं।

ग्वालियर निवासी महिला कांग्रेस इंटक की प्रदेश अध्यक्ष और क्षत्रिय राजपूत समाज की प्रदेश अध्यक्ष शांति कुशवाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू के आह्वान पर आपत्तिजनक पोस्ट किये हैं । अपने फेसबुक पर दो दिनों में उन्होंने कई पोस्ट जनता कर्फ्यू के खिलाफ लिखी हैं। शांति कुशवाह ने लिखा है कि ऐसा कौन सा वायरस है जो रविवार को ही फैलेगा, अनपढ़ों से पाला पड़ा है तो झेलना ही पड़ेगा। एक अन्य पोस्ट में कांग्रेस नेत्री ने लिखा कि मात्र 14 घंटे घर में रहने से कोरोना खत्म हो जायेगा, चीन, अमेरिका, इटली भी भेजो इस वैज्ञानिक को। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए 100 करोड़ का खर्चा और कोरोना वायरस के लिए यहाँ ताली, थाली बजानी है चौकीदार को।

शांति कुशवाह ने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि 14 घंटे सारे भारतवासी घर के बाहर नहीं निकलेंगे तो कोरोना कंफ्यूज होकर चीन वापस चला जायेगा। कौन सा नशा करता है ये। महिला कांग्रेस नेत्री के इन पोस्ट पर उनके फेसबुक पर जुड़े अन्य कांग्रेसी भी आपत्तिजनक कमेंट कर रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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