रामराजा के दर पर पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष बनने के सवाल पर पहली बार दिया जवाब

रामराजा के दर पर पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष बनने के सवाल पर पहली बार दिया जवाब

मयंक दुबे/निवाड़ी। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड दौरे पर हैं। आज सिंधिया निवाड़ी जिले के ओरछा पहुंचे जहां उन्होंने रामराजा के दरवार में मत्था टेका।उसके बाद सिंधिया ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हम धर्मिक स्थल पर राजनीति की बात नही करते और राजनैतिक स्थलों पर धर्म की बात लेकिन रामराजा के दरवार में आना उनका सौभाग्य है और उन्होंने देश के नौजवान और किसान की खुशहाली की दरवार में मन्नत मांगी है। ओरछा के बाद निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर में वाणिज्य कर मंत्री ब्रजेंद्र सिंह के घर पहुंचे। सिंधिया ने दिल्ली चुनाव परिणाम में कांग्रेस के प्रदर्शन को निराशाजनक बताया साथ ही वह पार्टी के आला नेताओं को नसीहत देते नजर आए। उन्होंने कहा की अब समय आ गया है जब नई सोच नई विचारधारा व नई कार्यप्रणाली की पार्टी को सख्त जरूरत है। खुद के प्रदेश अध्यक्ष बनने के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि सिंधिया परिवार का मुखिया किसी पद व कुर्सी के लिए जनसेवा नहीं करता।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के उनके प्रदेश के मुख्यमंत्री पद में रोड़े के सवाल पर सिंधिया मुस्कुराते हुए सवाल टाल दिया। उन्होंने कहा की आपके बीच मे भी रहकर भी मैं खुश रहता हूं। साथ ही सिंधिया ने सीएए और एनआरसी पर बात करते हुए  कहा कि हमारा देश वसुदेव कुटुम्बकम की विचारधारा का है ऐसे में कोई भी विधेयक जो देश को साथ लेकर नहीं चल सकता वह देशहित में नहीं हो सकता। ग्वालियर चम्बल क्षेत्र में लगातार दौरों के बाद अब बुन्देलखण्ड में सिंधिया की उपस्थिति के  हलको  में अलग-अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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