LETTER WAR : सिंधिया को लेकर आपस में भिड़े कांग्रेस और BJP के विधायक

LETTER WAR : सिंधिया को लेकर आपस में भिड़े कांग्रेस और BJP के विधायक

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

सिंधिया के बयानों के बीच मचे राजनैतिक घमासान में भाजपा विधायक रमेश मेंदोला की एंट्री ने इसे बयान वार में बदल दिया है। सिंधिया समर्थकों के कड़े तेवर के बाद ग्वालियर दक्षिण विधायक प्रवीण पाठक ने विधायक मेंदोला को करारा जवाब दिया है।इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस -बीजेपी के बीच लेटर वार शुरु हो गया है।

ग्वालियर दक्षिण विधायक प्रवीण पाठक को लोग सामान्य तौर पर सिंधिया खेमे का नहीं मानते लेकिन भाजपा विधायक का सिंधिया को लिखे पत्र का जवाब देकर विधायक पाठक ने बता दिया कि कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं। मेंदोला को संबोधित पत्र में विधायक पाठक ने सिंधिया को जन नायक, जन सेवक, भारत को सबसे पुरानी पार्टी के युवा तुर्क, एवं वर्तमान भारतीय राजनीति की तरुणाई जैसे शब्दों से संबोधित किया है। उन्होंने कहा कि मुझे मालूम है कि सिंधिया जी आपके पत्र का जवाब नहीं देंगे। वे हमारी प्रेरणा हैं, ऊर्जा का अक्षय स्रोत हैं इसलिए हमारे जैसे लाखों कार्यकर्ता उनके साथ हैं। प्रवीण पाठक ने लिखा कि आप समझ लें कि कहीं कोई टकराव नहीं है। आप मुझसे उम्र और राजनैतिक अनुभव में बड़े हैं लेकिन आपने सिंधिया को संबोधित पत्र को पवनसुत हनुमान जी के माध्यम से अध्यात्मिक कलेवर देने का असफल प्रयास किया है जिससे आपकी स्वार्थी, राजनैतिक महत्वाकांक्षा की दुर्गंध आती है। पत्र में विधायक पाठक ने भाजपा के 15 वर्षों के शासन में हुए घोटालों का भी उल्लेख किया है। इस पत्र के बाद से प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है

पढिये क्या लिखा प्रवीण पाठक ने अपने पत्र में….

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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