जिला अस्पताल में दवाइयों की किल्लत से मरीज परेशान

जिला अस्पताल में दवाइयों की किल्लत से मरीज परेशान

अनुराग शर्मा//सीहोर. जिला अस्पताल के हाल इतने बदतर हो चुके हैं कि आए दिन मरीजों को किसी ना किसी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। मरीज अपनी शिकायतें दर्ज भी करवाए तो कार्यवाही नहीं होती है। इसी बीच दवाई की किल्लत को लेकर एक खबर सामने आई है।

सीहोर के जिला अस्पताल में बीते 15 दिन से लगातार दवाइयों की कमी बनी हुई है। ऐसे में यहां आने वाले गरीब और बेबस मरीज बाहर से दवाइयां खरीदने को मजबूर हो रहे हैं l हाल यह है कि यहां करीब 450 प्रकार की दवाइयों की सप्लाई रिकार्ड में दर्ज है लेकिन इसमें से महत्त्पूर्ण जीवन रक्षक करीब 150 से भी अधिक प्रकार की दवाएं पिछले 8 से 10 माह से उपलब्ध ही नही है। अस्पताल में आए मरीजों का सीधा सा कहना है कि हम यहां जब इलाज करवाने के लिए आए, तब हमें जो गोली दवाइयां टेबलेट लिखी गई वह हॉस्पिटल के मेडिकल में उपलब्ध ही नहीं है। अब हमें महंगे दामों पर बाजार के दुकानदारों से टेबलेट खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। हमारी मांग है कि हॉस्पिटल में जल्द ही सभी दवाइयां उपलब्ध कराई जाए

इस पूरे मामले पर डॉ सुधीर श्रीवास्तव RMO अधिकारी ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा  कि हमारे द्वारा मध्यप्रदेश शासन को गोली-दवाइयों की कमी के बारे में अवगत करा दिया गया है। जैसे ही हमें दवाइयां उपलब्ध कराई जाती है। वैसे ही मरीजों को बांटना चालू कर दी जाएगी। अब देखना है कि मरीजों को दवाइयां कब तक उपलब्ध कराई जाती है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews