VIDEO: सिंधिया का फिर छलका दर्द, बोले-सांसद होता तो खुद बैठकर कराता काम

VIDEO: सिंधिया का फिर छलका दर्द, बोले-सांसद होता तो खुद बैठकर कराता काम

शिवपुरी। परवेज खान।
कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद गुरुवार की रात पहली बार शिवपुरी नगर में जनता के बीच पहुंचे। समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया ।इस दौरान सिंधिया ने सर्किट हाउस में जनता दरबार लगाकर लोगों की वन टू वन समस्याएं सुनी।इस दौरान हार को लेकर एक बार फिर सिंधिया का दर्द मीडिया के सामने छलक आया ।उन्होंने कहा कि वे अब एक सामान्य व्यक्ति है, सांसद होते तो जनता के काम आसानी से करवा देते ।सिंधिया का बयान ऐसे समय पर आया है जब सियासी गलियारों में उनके पीसीसी चीफ बनने और राज्यसभा में जाने की अटकलें तेज है। सिंधिया के इस बयान से सियासी गलियारों में कई मायने निकलना शुरु हो गए है।

दरअसल, शिवपुरी में विकास एवं योजनाओं से जुड़े एक सवाल पर ज्योतिरादित्य सिंधिया बेहद भावुक हो गए और बोले कि क्षेत्र की जनता ने मुझे भार मुक्त कर दिया है और अब में एक सामान्य नागरिक हुं। जब उनसे पूछा गया आप कैसे सामान्य व्यक्ति हो सकते है , आधी केबिनेट तो आपकी है तो सिंधिया बोले कैबिनेट में मेरा कुछ नही है, व्यक्ति को अपना स्तर स्वतः समझना चाहिए । मैं अब एक सामान्य नागरिक हुं और  इस नाते सिर्फ योजनाओं के लिए गुहार लगा सकता हुं यदि में सांसद होता तो खुद बैठकर योजनाओं को पूरा कराता जैसे पहले कराता था लेकिन शिवपुरी की जनता ने मुझे दूर रखने का निर्णय पहले ही ले लिया था । सिंधिया के साथ शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी,महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी, प्रभारी मंत्री प्रधुम्न तोमर मौजूद रहे ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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