कमलनाथ और कांग्रेस का संकटमोचक बना यह युवा विधायक

कमलनाथ और कांग्रेस का संकटमोचक बना यह युवा विधायक

ग्वालियर| अतुल सक्सेना| ऐसे समय में जब कांग्रेस में भगदड़ मची है और कई कांग्रेसियों की निष्ठा पर संदेह पैदा हो रहा है, ग्वालियर का एक युवा विधायक कदम से कदम मिलाकर कमलनाथ के साथ खड़ा है ।हम बात कर रहे हैं ग्वालियर दक्षिण पश्चिम से विधायक प्रवीण पाठक की ।विधानसभा चुनावों में बीजेपी के अजेय माने जाने वाले पूर्व मंत्री नारायण कुशवाहा को शिकस्त देकर विधानसभा में पहुंचे प्रवीण पाठक ने कम उम्र में ही अपना एक अलग मुकाम बनाया है। इसके साथ-साथ प्रवीण पाठक ने इस दौर में जब कमलनाथ सरकार संकट में गुजर रही है कुशल रणनीतिकार के रूप में अपनी भूमिका बखूबी निभाई है ।कमलनाथ सरकार के कई मंत्रियों और विधायकों से लगातार संपर्क कर पार्टी को एकजुट रखने की पुरजोर कोशिश करने में लगे हैं। अपने विनम्र और शालीन व्यवहार के चलते एक अलग पहचान बनाने वाले प्रवीण पाठक ने राजनीति की दृष्टि से एक बहुत बड़ा रिस्क जरूर लिया है कि वह महल के खिलाफ कमलनाथ के साथ खड़े हैं ,लेकिन उनका कहना है कि पार्टी के सिद्धांत और निष्ठा पहले हैं, व्यक्ति विशेष के लिए बाद में।फेसबुक पर उन्होने कमलनाथ के समर्थन मे यह कविता शेयर की है:

धरकर चरण विजित श्रृंगों पर झंडा वही उड़ाते हैं,
अपनी ही उँगली पर जो खंजर की जंग छुडाते हैं।
नींद कहाँ उनकी आँखों में जो धुन के मतवाले हैं ?
गति की तृषा और बढती, पड़ते पग में जब छले हैं।
जिन्हें देखकर डोल गयी हिम्मत दिलेर मर्दानों की
उन मौजों पर चली जा रही किश्ती कुछ दीवानों की।
बेफिक्री का समाँ कि तूफाँ में भी एक तराना है,
दांतों उँगली धरे खड़ा अचरज से भरा ज़माना है।
अभय बैठ ज्वालामुखियों पर अपना मन्त्र जगाते हैं।
ये हैं वे, जिनके जादू पानी में आग लगाते हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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