पर उपदेश कुशल बहुतेरे..केंद्रीय मंत्री, सांसद और अधिकारियों ने ही की निर्देशों की अवहेलना

पर उपदेश कुशल बहुतेरे..केंद्रीय मंत्री, सांसद और अधिकारियों ने ही की निर्देशों की अवहेलना

जबलपुर/संदीप कुमार

कहते हैं छात्रों को सिखाने से पहले शिक्षकों को उस सीख पर अमल करना चाहिये, लेकिन अगर सिखाने वाले ही वो गलती दोहराएं तो भला आम लोग कैसे सीखेंगे। जबलपुर में कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब कलेक्ट्रेट में कोरोना वायरस को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल और सांसद राकेश सिंह ने पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक के दौरान तो अधिकारी और नेताओं ने सोशल डिस्टेंसिंह का पालन किया, लेकिन जैसे ही बैठक खत्म हुई तो सारे लोग समूह बनाकर बिना डिस्टेंस का पालन किये चर्चा करते रहे।

नेता और अधिकारी भूल गए सोशल डिस्टेंसिंग

कोरोना वायरस से निपटने और इससे बचाव के साथ साथ लोगों को जागरूक करने के लिए ये बैठक बुलाई गई थी। इसमें केंद्रीय मंत्री, सांसद और विधायक सहित कई अधिकारी उपस्थित हुए। बैठक के बाद सभी अधिकारी जब परिसर के बाहर पहुँचे तो एक साथ खड़े होकर बातें करते रहे। इतना ही नही केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल और सांसद राकेश सिंह जब अपनी कार में बैठ चुके थे तब भी संभाग कमिश्नर, आईजी, डीआईजी और अन्य अधिकारी उनसे चर्चा करते रहे। जबकि एक दिन पहले इन्हीं अधिकारियों द्वारा पूरे जिले में सोशल डिस्टेन्स का पालन करने के निर्देश दिए गए थे।

सांसद राकेश सिंह ने अपनी कार में पांच लोगों को बिठाया

बात यहीं खत्म नहीं होती है, बैठक समाप्त होने के बाद सभी अधिकारी और जनप्रतिनिधि केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल से बात करते रहे, इसके बाद उन्होने सांसद राकेश सिंह से भी बात की और फिर राकेश सिंह की गाड़ी में पाँच लोग एक साथ बैठ कर जाते हुए नजर आए। इस तरह कलेक्ट्रेट में और फिर कार में भी उन्हीं नेताओं और अधिकारियों ने खुलेआम निर्देशों की अवहेलना की, जो इन निर्देशों को निर्धारित करते हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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