इन लोगों के लिए नुकसानदायी है चुकंदर, ये बीमारी हो तो चुकंदर से रहें दूर

इन लोगों के लिए नुकसानदायी है चुकंदर, ये बीमारी हो तो चुकंदर से रहें दूर

हेल्थ, डेस्क रिपोर्ट। सलाद खाने की सलाह तो डाइटीशियन सहित सभी बड़े बुजुर्ग देते हैं, सर्दी का सीजन हो तो गाजर, चुकंदर और मूली तो सलाद में होना ही चाइए। पर, क्या ये जानते हैं कि चुकंदर शरीर के लिए जितना फायदेमंद है कुछ लोगों के लिए उतना ही नुकसानदायी भी हो सकता है ! चुंकदर में आयरन की भरमार होती है जिन्हें खून की कमी होती है उन लोगों को चुकंदर खाने, उसका जूस पीने, हर बात की सलाह भी जाती है। लेकिन आप अगर कुछ तकलीफों से जूझ रहे हैं तो चुकंदर खाने से पहले ये जान लें कि कहीं ये आपका बड़ा नुकसान न कर दे।

लो ब्लड प्रेशर
अगर आपका बीपी लो रहता हो तो चुकंदर सोच समझ कर ही खाएं। चुकंदर में नाइट्रेट अच्छी मात्रा में होता है जो डाइजेशन के वक्त नाइट्रिक ऑक्साइड में तब्दील हो जाता है। इस कंपोनेंट का असर ब्लड वेसेल्स पर पड़ता है, जिसकी वजह से बीपी पर भी प्रभाव नजर आता है। इसलिए लो बीपी वालों को या तो चुकंदर से परहेज करना चाहिए या फिर बहुत कम मात्रा में खाना चाहिए।

पथरी होने पर
अगर आपको स्टोनी की समस्या नहीं है तो आप जीभर कर चुकंदर खाइए पर यदि आपको स्टोन और खासतौर से किडनी में स्टोन है तो फिर चुकंदर न खाना ही बेहतर होगा। चुकंदर में ऑक्सलेट की मात्रा काफी ज्यादा होती है, ये स्टोन होने पर किडनी को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इसके सेवन से बचना चाहि।

एलर्जी होने पर
किसी किस्म की एलर्जी रहती हो तो भी चुकंदर से परहेज करें। कुछ लोगों को चुकंदर से चकत्ते हो जाते हैं, खुजली या पित्त उछलने की तकलीफ भी हो सकती है। कुछ लोगों को वोकल कॉर्ड्स में भी दिक्कत आ सकती है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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