Mental Health : क्या है मानसिक स्वास्थ्य, इस तरह रखें अपना खयाल

Mental Health : क्या है मानसिक स्वास्थ्य, इस तरह रखें अपना खयाल

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं तो इसमें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों शामिल होते हैं। लेकिन हम अक्सर ही अपनी मेंटल हेल्थ (mental health) को लेकर लापरवाह होते हैं। अगर कोई शारीरिक रूप से स्वस्थ है लेकिन उसका मानसिक स्वास्थ्य खराब है तो इस स्थिति में उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मानसिक स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति, उसकी खुशी या जीवन के प्रति उसके नजरिये के लिए जिम्मेदार होता है।

करोड़ों लोगों के लिए महत्वपूर्ण खबर, UIDAI ने AADHAR को लेकर जारी किया सर्कुलर, जानें वरना नहीं उठा पाएंगे योजना Subsidy का लाभ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मानसिक स्वास्थ्य को परिभाषित करते हुए कहा है कि ‘यह सलामती की एक स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास रहता है, वह जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, लाभकारी और उपयोगी रूप से काम कर सकता है और अपने समाज के प्रति योगदान करने में सक्षम होता है।’ इसलिए हमें अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने और उसका ध्यान रखने की जरुरत है। मानसिक स्वास्थ्य में हमारे भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण शामिल हैं। ये हमारी सोच और महसूसने की क्षमता को प्रभावित करता है। हमारी सोच, मनोदशा और व्यवहार को प्रभावत करने वाले कारणों में जैविक कारक (Biological factors) शामिल हैं जैसे कि जीन या मस्तिष्क रसायन। इसी के साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का पारिवारिक इतिहास भी इस बात की संभावना बढ़ाता है कि आप इसके लिए कितने आसान टार्गेट हैं। जीवन के अनुभव, कोई दुख तकलीफ या सदमा, अवसाद वाला वातावरण, बचपन की कोई बुरी याद, तनावपूर्ण घटनाएं, नकारात्मक विचारों का आधिक्य, स्वास्थ्य के प्रति लापरवाली, गैर अनुशासित आदतों जैसे कि पर्याप्त नींद न लेना या खराब खानपान, ड्रग्स और अल्कोहल का उपयोग, लंबी बीमारी आदि आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार होते हैं।

दिक्कत की बात ये है कि आज भी हमारे समाज में इसे लेकर टैबू है। लोग किसी भी तरह की मानसिक परेशानी या रोग को ‘पागलपन’ से जोड़ते हैं और यही कारण है कि अक्सर ही ऐसी बातों को नजरअंदाज किया जाता है। जबकि ऐसे में तुरंत किसी मनोचिकित्सक (psychiatrist), मनोवैज्ञानिक (psychologist) या विषय विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए। अगर आपको किसी भी कारण से डिप्रेशन, एंग्जायटी या किसी और तरह के मनोविकार के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिले। जब हमें शारीरिक बीमारी में डॉक्टर की मदद लेने में हिचक नहीं होती, तो मानसिक बीमारी में भी नहीं होनी चाहिए। इसी के साथ अपने माता पिता, पार्टनर, दोस्तों या प्रियजनों से अपनी मानसिक दशा को शेयर करें। जो लोग आपको भावात्मक संबल दे सकते हैं उनके नजदीक रहें और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।

मानसिक स्वास्थ्य के बेहतर होने के लक्षणों में शुमार है कि व्यक्ति संतोषी और प्रसन्नचित्त रहता है। उसे ज्यादा गुस्सा नहीं आता, वो भय, प्रेम द्वेष, नैराश्य, अपराध, दुश्चिंताआदि आवेगों से व्यथित नहीं होता। उसे न तो खुद पर अति विश्वास होता है न ही वो दूसरों को हीन समझता है। उसमें करूणा और प्रेम की भावना होती है, दूसरों की भावनाओं का सम्मान करता है। जीवन की समस्याओं का सकारात्मक रवैये से सामना करता है। वह अपने परिवेश को अनुकूल बनाने की कोशिश करता है और परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाता है। उसे सही गलत का फर्क पता होता है और वो हमेशा दूसरों की सहायता को तत्पर रहता है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews