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भरमौर में 134 दिन बाद खुले कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट, पंजाब-हरियाणा से भी पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु

Written by:Banshika Sharma
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हिमाचल प्रदेश के भरमौर स्थित प्रसिद्ध कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट मंगलवार को 134 दिनों के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। बैसाखी संक्रांति पर भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिक स्वामी के एकांतवास से लौटने की मान्यता के बाद मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और जागरण हुआ, जिसमें हिमाचल समेत कई राज्यों के सैकड़ों भक्त शामिल हुए।
भरमौर में 134 दिन बाद खुले कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट, पंजाब-हरियाणा से भी पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु

हिमाचल प्रदेश के भरमौर में स्थित प्रसिद्ध कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट मंगलवार को 134 दिन बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। बैसाखी संक्रांति के पावन अवसर पर विधि-विधान के साथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और हवन किया गया। मंदिर खुलने के बाद पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।

मंदिर खुलने के उपलक्ष्य में सोमवार रात से ही यहां भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और जम्मू से भी सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। मंगलवार सुबह शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के कपाट खोले गए और भक्तों ने भगवान कार्तिक स्वामी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

सर्दियों के मौसम में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं

दरअसल, हर साल सर्दियों के मौसम में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। कुगती क्षेत्र में नवंबर के मध्य से भारी बर्फबारी शुरू हो जाती है, जिसके कारण पूरा इलाका बर्फ से ढक जाता है और आवागमन बंद हो जाता है। इसी वजह से मंदिर को करीब चार महीने तक बंद रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपावली के बाद भगवान कार्तिकेय एकांतवास में चले जाते हैं और बैसाखी संक्रांति के दिन वापस अपने धाम लौटते हैं। इसी दिन मंदिर के कपाट फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं।

प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध

मंदिर बंद रहने के दौरान एक विशेष परंपरा का भी पालन किया जाता है। इस अवधि में मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में किसी के भी प्रवेश पर रोक रहती है। स्थानीय लोग इस परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करते हैं, जो यहां की सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं को दर्शाता है। मान्यता है कि भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिक स्वामी ने संसार का भ्रमण करने के बाद इस दुर्गम और शांत स्थान को अपना निवास स्थान बनाया था। तभी से यह स्थान एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हो गया। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराता है।

कुगती क्षेत्र में स्थित यह मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी काफी प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी रास्तों और जंगलों से होकर ट्रैकिंग करनी पड़ती है, जो साहसिक पर्यटकों को भी आकर्षित करती है। हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस क्षेत्र में पहुंचते हैं। आमतौर पर यहां आने वाले श्रद्धालु पास में स्थित मणिमहेश झील की यात्रा भी करते हैं। हालांकि इस समय मणिमहेश यात्रा मार्ग बंद है। इस साल क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण रास्ते बर्फ से ढक गए हैं और कई जगह मार्ग क्षतिग्रस्त भी हो गए हैं।

मणिमहेश की ओर जाने पर फिलहाल रोक

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर धंछो से आगे मणिमहेश की ओर जाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि जब तक रास्ते पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा। फिलहाल कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट खुलने से भरमौर क्षेत्र में श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। दूर-दराज से आए भक्त भगवान कार्तिक स्वामी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी कर रहे हैं और मंदिर परिसर जयकारों से गूंज रहा है।

आमतौर पर, कार्तिक स्वामी मंदिर के दर्शन करने वाले श्रद्धालु प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा पर भी जाना पसंद करते हैं। हिमाचल प्रदेश के ये दोनों ही धार्मिक स्थल आस्था के बड़े केंद्र हैं और अक्सर भक्त अपनी यात्रा में दोनों स्थानों को शामिल करते हैं। हालांकि, इस बार मणिमहेश यात्रा पर जाने के इच्छुक श्रद्धालुओं को अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि यात्रा मार्ग फिलहाल बंद है।’

मरम्मत का काम अभी भी जारी

इस वर्ष मणिमहेश क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से भारी हिमपात हुआ है। बर्फ की मोटी चादरों ने पूरे यात्रा मार्ग को ढक दिया है, जिससे रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो गए हैं और चलना बेहद जोखिम भरा हो गया है। इसके अलावा, बीते साल मानसून के दौरान हुई भीषण बारिश और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने भी मणिमहेश की ओर जाने वाले कई मुख्य रास्तों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। इन टूटे हुए रास्तों की मरम्मत का काम अभी भी जारी है और सुरक्षा की दृष्टि से ये मार्ग फिलहाल आवागमन के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

इन सभी गंभीर परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, भरमौर के SDM (उप-मंडल मजिस्ट्रेट) ने धंछो से आगे मणिमहेश की तरफ जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए उठाया गया है। प्रशासन लगातार रास्तों की बहाली और यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जब तक स्थिति सामान्य और सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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