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102 साल पुराने कमला नेहरू अस्पताल को IGMC शिफ्ट करने के फैसले पर बवाल, बीजेपी और महिला समिति का विरोध

Written by:Banshika Sharma
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 102 साल पुराने कमला नेहरू मातृ-शिशु अस्पताल को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में शिफ्ट करने के सुक्खू सरकार के फैसले पर भारी बवाल शुरू हो गया है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति और विपक्षी दल बीजेपी ने इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
102 साल पुराने कमला नेहरू अस्पताल को IGMC शिफ्ट करने के फैसले पर बवाल, बीजेपी और महिला समिति का विरोध

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 102 साल पुराने कमला नेहरू मातृ-शिशु अस्पताल को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में शिफ्ट करने के सुक्खू सरकार के फैसले पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के खिलाफ अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति और विपक्षी दल बीजेपी ने विरोध शुरू कर दिया है। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो जाएंगी और महिलाओं व बच्चों के लिए बनी एक पुरानी और महत्वपूर्ण सुविधा खत्म हो जाएगी।

कमला नेहरू अस्पताल हिमाचल प्रदेश का इकलौता मातृ-शिशु अस्पताल माना जाता है। जैसे ही इसे IGMC में शिफ्ट करने की खबर सामने आई, लोगों में नाराजगी बढ़ गई। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने अस्पताल के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के फैसले को महिला विरोधी बताया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चेतावनी दी कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि यह अस्पताल स्वतंत्रता सेनानी कमला नेहरू के नाम पर है और इसे शिफ्ट करना उनकी विरासत का अपमान है।

महिला समिति ने विरोध जताया

महिला समिति की राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि यह अस्पताल 102 साल पुराना है और गर्भवती महिलाओं से लेकर नवजात शिशुओं तक के इलाज की सभी सुविधाएं यहां एक ही जगह मिलती हैं। उनका कहना है कि अस्पताल को IGMC में शिफ्ट करने से महिलाओं को इलाज के लिए अलग-अलग जगह जाना पड़ेगा, जिससे उन्हें परेशानी होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस जगह पर MLA हॉस्टल बनाना चाहती है, इसलिए अस्पताल को हटाया जा रहा है।

फालमा चौहान ने कहा कि अगर सरकार सच में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है तो उसे कमला नेहरू अस्पताल को और मजबूत करना चाहिए। उनका आरोप है कि अस्पताल की जमीन पर विधायकों के लिए हॉस्टल बनाने की योजना आम जनता के साथ अन्याय है, खासकर उन महिलाओं के साथ जो ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए यहां आती हैं।

बीजेपी ने भी सरकार को घेरा

इस मुद्दे पर विपक्षी दल बीजेपी ने भी सरकार को घेरा है। बीजेपी शिमला के जिला अध्यक्ष केशव चौहान ने कहा कि अस्पताल को शिफ्ट करने का फैसला गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और मुश्किल बना देगा। उनका कहना है कि IGMC में इलाज की प्रक्रिया ज्यादा जटिल और महंगी है, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

केशव चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में मेडिकल टेस्ट की फीस बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि जो जांच पहले 30 रुपए में होती थी, उसे बढ़ाकर 100 रुपए कर दिया गया है। इसी तरह स्पेशल वार्ड का किराया भी बढ़ाया गया है। पहले जो वार्ड 1000 रुपए में मिलता था, अब उसका किराया 1500 से 2000 रुपए तक कर दिया गया है।

बीजेपी नेता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कमला नेहरू अस्पताल को IGMC शिफ्ट करने का फैसला वापस नहीं लिया तो पार्टी इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन करेगी। उनका कहना है कि यह केवल अस्पताल के स्थानांतरण का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकार की प्राथमिकताओं से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कोई फैसला नहीं बदला गया तो शिमला में यह विरोध प्रदर्शन बड़े जन आंदोलन में बदल सकता है।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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