हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के फैसले को लेकर छात्र संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। दरअसल विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद ने 28 मार्च को यह फैसला लिया था। वहीं इस निर्णय के खिलाफ स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे छात्र विरोधी बताया है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि फीस बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई तो पूरे प्रदेश में बड़ा छात्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
दरअसल एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी के सचिव सन्नी सेक्टा ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह फैसला सीधे तौर पर छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला है। उनका कहना है कि ऐसे समय में फीस बढ़ाई गई है जब कई छात्र और उनके परिवार पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। इसलिए संगठन इस फैसले को छात्र हितों के खिलाफ मानता है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग करता है।
अब लगभग 25 प्रतिशत अधिक फीस देनी होगी
एसएफआई के अनुसार फीस बढ़ोतरी का असर कई प्रमुख पाठ्यक्रमों पर पड़ेगा। इनमें कला स्नातकोत्तर, विधि स्नातक, विधि स्नातकोत्तर, पर्यटन प्रबंधन, कंप्यूटर अनुप्रयोग, विज्ञान स्नातकोत्तर, प्रौद्योगिकी स्नातकोत्तर, पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन और होटल प्रबंधन जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। वहीं इन पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को अब लगभग 25 प्रतिशत अधिक फीस देनी होगी।
दरअसल संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि केवल कोर्स फीस ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी शुल्कों में भी बढ़ोतरी की गई है। परीक्षा शुल्क में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इसके अलावा छात्रावास शुल्क में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है, जिससे हॉस्टल में रहने वाले छात्रों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ जाएगा।
वहीं शोध कार्यक्रमों से जुड़े छात्रों के लिए भी यह फैसला चिंता का कारण बन गया है। दरअसल पीएचडी शोध प्रबंध जमा करने और मूल्यांकन शुल्क में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। वहीं शोध कार्य की समय सीमा बढ़ाने के शुल्क में 33 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। एसएफआई ने प्रबंधन, कंप्यूटर अनुप्रयोग, प्रौद्योगिकी, पर्यटन और विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रमों में परियोजना रिपोर्ट शुल्क में 200 प्रतिशत तक की वृद्धि पर भी चिंता जताई है।
संगठन ने दी बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी
दरअसल संगठन का कहना है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब कोविड-19 के बाद कई परिवारों की आर्थिक स्थिति अभी भी पूरी तरह संभल नहीं पाई है। ऐसे में फीस में इतनी बड़ी बढ़ोतरी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल बना सकती है। एसएफआई ने राज्य सरकार पर भी आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं दी जा रही है, जिसके कारण विश्वविद्यालय अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए छात्रों पर शुल्क का बोझ बढ़ा रहा है। संगठन ने कहा कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो पूरे हिमाचल प्रदेश में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।






