इंदौर में कॉपी-किताब की मोनोपोली के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल गांधीनगर क्षेत्र में स्थित वर्ल्ड पीस स्कूल के संचालक और प्राचार्य के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एक अभिभावक की शिकायत के बाद हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्कूल छात्रों को केवल स्कूल परिसर में मौजूद तय दुकान से ही कॉपी-किताब खरीदने के लिए मजबूर कर रहा था।
मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर जांच कराई गई। शिकायत के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी किताबें और कॉपियां केवल स्कूल परिसर की दुकान से ही खरीदी जाएं। अभिभावकों का आरोप था कि वही किताबें शहर की अन्य दुकानों पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही थीं, जिससे उन्हें मजबूरन स्कूल द्वारा तय दुकान से ही अधिक कीमत पर सामग्री खरीदनी पड़ रही थी।
जिला प्रशासन ने तुरंत जांच दल गठित किया
शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत जांच दल गठित किया। शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने बिना सूचना के स्कूल पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि परिसर में एक तय दुकान से ही किताबें बेची जा रही थीं और छात्रों पर वहीं से खरीदने का दबाव था। जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल प्राचार्य ने लिखित रूप में स्वीकार किया कि पुस्तकों की व्यवस्था से जुड़े नियम स्कूल प्रबंधन द्वारा ही बनाए गए थे।
जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद गांधीनगर थाना में स्कूल संचालक और प्राचार्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 2023 की धारा 223 के तहत केस दर्ज किया गया है। प्रशासन ने इसे पहले जारी किए गए प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन माना है, जिनमें स्कूलों को कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म की बिक्री में किसी भी तरह की मोनोपोली न करने के निर्देश दिए गए थे।
अभिभावकों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: कलेक्टर शिवम वर्मा
कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यावसायीकरण और अभिभावकों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अन्य स्कूलों में भी ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल इंदौर में हर साल नए शैक्षणिक सत्र के दौरान कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म को लेकर स्कूलों की मनमानी की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे मामलों में अभिभावकों को तय दुकानों से ही सामग्री खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। प्रशासन की यह कार्रवाई इसी तरह की मोनोपोली पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






