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इंदौर SGSITS के पूर्व परीक्षा नियंत्रक ने पद से हटाने पर डायरेक्टर से मांगी मृत्यु की अनुमति, जानिए क्या है पूरा मामला?

Written by:Rishabh Namdev
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इंदौर के श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस में प्रशासनिक गतिरोध के चलते पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. लीलाधर मालवीय को पद से हटा दिया गया है। वहीं पद से हटाए जाने के बाद मालवीय ने डायरेक्टर से एक अनोखी मांग करते हुए अपने केबिन के बाहर मृत्यु की अनुमति मांगी है।
इंदौर SGSITS के पूर्व परीक्षा नियंत्रक ने पद से हटाने पर डायरेक्टर से मांगी मृत्यु की अनुमति, जानिए क्या है पूरा मामला?

इंदौर के श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) में प्रशासनिक विवाद के बीच पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. लीलाधर मालवीय को उनके पद से हटा दिया गया है। दरअसल पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने संस्थान के डायरेक्टर को एक पत्र लिखकर अनोखी मांग कर दी। बता दें कि उन्होंने अपने पत्र में डायरेक्टर के केबिन के बाहर मृत्यु की अनुमति देने की बात कही है, जिससे यह मामला कॉलेज परिसर में चर्चा का विषय बन गया है।

बताया जा रहा है कि एसजीएसआईटीएस में पिछले कई महीनों से प्रशासनिक गतिरोध और रिजल्ट में देरी को लेकर तनाव का माहौल था। वहीं इसी बीच कॉलेज प्रबंधन ने प्रो. लीलाधर मालवीय को परीक्षा नियंत्रक के पद से हटाने का फैसला लिया। उनकी जगह अब प्रो. स्मिता वर्मा को नया एग्जाम कंट्रोलर नियुक्त किया गया है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

दरअसल पद से हटाए जाने की सूचना मिलने के बाद प्रो. मालवीय ने डायरेक्टर को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने अपने केबिन के बाहर मृत्यु की अनुमति देने की मांग की। उनके इस पत्र के बाद संस्थान के भीतर यह मामला काफी चर्चा में आ गया है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार प्रो. मालवीय पर कई गंभीर आरोप लगे थे। आरोप है कि उन्होंने संस्थान के आंतरिक व्हाट्सएप ग्रुप में वरिष्ठ प्रोफेसरों के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा उन पर सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर संस्थान के खिलाफ टिप्पणियां करने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाने का भी आरोप है। प्रबंधन ने इन आरोपों को अनुशासनहीनता और संस्थान के प्रोटोकॉल का उल्लंघन मानते हुए यह कार्रवाई की।

यह कदम उठाना जरूरी था: संस्थान प्रबंधन

इन घटनाओं के कारण कॉलेज के भीतर का माहौल काफी प्रभावित हुआ था। संस्थान प्रबंधन का कहना है कि कॉलेज की गरिमा और आंतरिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। वहीं इस पूरे मामले में प्रो. लीलाधर मालवीय का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उनकी चुप्पी के कारण मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान के डायरेक्टर ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में संस्थान के बाहर के दो आईटी विशेषज्ञ प्रोफेसरों को भी शामिल किया गया है। समिति केवल प्रो. मालवीय के खिलाफ लगे आरोपों की जांच ही नहीं करेगी, बल्कि संस्थान में सॉफ्टवेयर अपडेट और डाटा हैंडलिंग से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की भी जांच करेगी।

इसी बीच कॉलेज परिसर में छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया का प्रदर्शन भी जारी है। छात्र संगठन कॉलेज फीस बढ़ोतरी के विरोध में आंदोलन कर रहा है। हालांकि यह मुद्दा अलग है, लेकिन इससे यह साफ है कि फिलहाल एसजीएसआईटीएस में कई प्रशासनिक और छात्र संबंधी मुद्दों को लेकर माहौल गर्म बना हुआ है।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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