इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। दरअसल यह मामला अब सिर्फ धर्म बनाम राष्ट्रवाद की बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक सौदेबाजी और कांग्रेस की अंदरूनी कलह की बात भी सामने आ रही है। कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने अपनी ही पार्टी की पार्षद फौजिया शेख अलीम और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बीच ‘डील’ होने का गंभीर आरोप लगाया है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि यह पूरा विवाद कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और पुरानी रंजिश का परिणाम है।
वहीं बताया जा रहा है कि इस विवाद की जड़ में शहर अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे और पार्षद फौजिया शेख अलीम के बीच पुराना मनमुटाव है। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान अब सार्वजनिक हो गई है। चिंटू चौकसे के समर्थक और कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने फौजिया शेख अलीम पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
दरअसल राजू भदौरिया ने आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद एक प्रोपेगेंडा के तहत खड़ा किया गया है। उनका कहना है कि फौजिया शेख और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बीच किसी तरह की ‘डील’ हुई है और इसी कारण यह मामला जानबूझकर खड़ा किया गया। भदौरिया के मुताबिक, व्यक्तिगत लाभ और राजनीतिक फायदे के लिए सिद्धांतों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि फौजिया शेख के पति शेख अलीम बार काउंसिल का चुनाव लड़ना चाहते हैं और धर्म से जुड़े विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाकर चुनावी फायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं।
पहले कई बार परिषद में वंदे मातरम् गा चुकी हैं: राजू भदौरिया
भदौरिया ने यह भी कहा कि फौजिया शेख पहले नेता प्रतिपक्ष रह चुकी हैं और कई बार परिषद में वंदे मातरम् गा चुकी हैं। यहां तक कि परिषद में वंदे मातरम् के दौरान खड़ी भी रहती थीं। ऐसे में इस बार उनका परिषद में करीब एक घंटे देरी से पहुंचना कई सवाल खड़े करता है, जबकि बहस के दौरान उनका पहला सवाल सूची में शामिल था। उनका कहना है कि जब फौजिया शेख बैठक में पहुंचीं तो पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने उनसे केवल इतना पूछा था कि क्या वे वंदे मातरम् नहीं गाना चाहती थीं। इस पर वे मना भी कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने कहा कि ‘कोई बाप नहीं गवा सकता, हम पर कोई जबरदस्ती नहीं कर सकता।’ भदौरिया का आरोप है कि निगम में उस समय ऐसे शब्दों की कोई जरूरत नहीं थी और यह सब एक रणनीति के तहत किया गया।
भदौरिया का यह भी कहना है कि महापौर ने जानबूझकर यह विवाद खड़ा होने दिया ताकि बजट भाषण पर बहस न हो सके और शहर के बड़े मुद्दे, खासकर भागीरथपुरा से जुड़े विषयों पर चर्चा टल जाए। उनका दावा है कि अगर बजट पर बहस होती तो महापौर की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो सकते थे।
जानिए इसे लेकर जीतू पटवारी ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने फिलहाल सीधा बयान देने से परहेज किया है। भोपाल में जब उनसे इस विवाद को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का महत्व सभी जानते हैं, इसे बताने या छिपाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस के किसी पार्षद ने कोई बात कही है तो पार्टी इस पर विचार कर निर्णय लेगी और समय आने पर इसकी जानकारी देगी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मामला उनके संज्ञान में है, लेकिन निर्णय कब लिया जाएगा यह बताने के लिए वे बाध्य नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार इंदौर कांग्रेस में पिछले काफी समय से दो गुट सक्रिय हैं। एक गुट का नेतृत्व शहर अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे कर रहे हैं, जबकि दूसरा गुट पार्षद फौजिया शेख और उनके समर्थकों का माना जाता है। यह विवाद कहीं न कहीं नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर भी बताया जा रहा है। फौजिया शेख पहले पांच साल तक नेता प्रतिपक्ष रह चुकी हैं और वे चाहती हैं कि चिंटू चौकसे इस पद से इस्तीफा दें और उन्हें फिर से यह जिम्मेदारी मिले। इसी को लेकर दोनों गुटों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है।
चिंटू चौकसे और शेख अलीम के बीच का विवाद भी पुराना बताया जाता है। 13 मई 2023 को स्वच्छता सर्वेक्षण के मुद्दे पर मेयर द्वारा बुलाई गई एक बैठक के बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हो गई थी। विवाद इतना बढ़ गया था कि स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई थी और वहां मौजूद अन्य नेताओं को बीच-बचाव कर दोनों को अलग करना पड़ा था।






