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जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुरू किया नशा मुक्ति अभियान, ‘निर्दोष को न छुएं और दोषी को न बख्शें’ की नीति पर दिया जोर

Written by:Gaurav Sharma
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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को 100 दिवसीय नशा मुक्त अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का लक्ष्य केंद्र शासित प्रदेश से नशे की समस्या को जड़ से खत्म करना है, जिसे पाकिस्तान प्रायोजित 5000 करोड़ रुपये के नारको-टेररिज्म का हिस्सा बताया जा रहा है। उपराज्यपाल ने सख्त कार्रवाई के साथ-साथ व्यापक जागरूकता पर जोर दिया, क्योंकि यह समस्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुरू किया नशा मुक्ति अभियान, ‘निर्दोष को न छुएं और दोषी को न बख्शें’ की नीति पर दिया जोर

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की शुरुआत कर दी। यह एक 100 दिवसीय विशेष अभियान है, जिसका आगाज जम्मू के एमए स्टेडियम से एक भव्य पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर किया गया। इस अभियान का सीधा मकसद केंद्र शासित प्रदेश से नशे की समस्या को जड़ से खत्म करना है, जो पाकिस्तान से पोषित 5000 करोड़ रुपये के काले कारोबार से जुड़ी है। उपराज्यपाल ने साफ कहा कि यह नशे की तस्करी युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां नारको-टेररिज्म के रूप में देखती हैं।

अभियान के तहत पूरे जम्मू-कश्मीर में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मई के पहले सप्ताह में श्रीनगर में भी इसी तरह का एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। उपराज्यपाल सिन्हा ने ‘निर्दोष को न छुएं और दोषी को न बख्शें’ की नीति पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा तस्करी के नेटवर्क पर लगातार सख्त कार्रवाई होगी, वहीं पीड़ितों की पहचान कर उनके पुनर्वास के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएंगे ताकि वे एक सामान्य जीवन जी सकें।

उपराज्यपाल ने पदयात्रा का भी किया नेतृत्व

इस अभियान की शुरुआत में उपराज्यपाल ने करीब 1900 मीटर लंबी पदयात्रा का नेतृत्व किया, जिसके जरिए उन्होंने शहरवासियों को नशा मुक्ति का संदेश दिया। यह पदयात्रा केवल जम्मू तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कठुआ, उधमपुर, रामबान समेत अन्य जिलों से होकर गुजरेगी और कश्मीर के सभी 10 जिलों तक पहुंचाई जाएगी। इसका उद्देश्य हर वर्ग के लोगों तक इस गंभीर समस्या की जानकारी और इसके खिलाफ एकजुट होने का आह्वान पहुंचाना है।

जम्मू-कश्मीर में नारको-टेररिज्म आज एक गंभीर और संगठित खतरे के रूप में सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, करीब 5000 करोड़ रुपये का यह अवैध कारोबार न सिर्फ युवाओं को नशे की लत में धकेल रहा है, बल्कि इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद को वित्तीय मदद देने में भी किया जा रहा है। इसे सीधे तौर पर पाकिस्तान प्रायोजित छद्म युद्ध का एक हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद भारत में अस्थिरता फैलाना है।

नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए सीमा पार से ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक माध्यमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास ड्रोन के जरिए हेरोइन और अन्य ड्रग्स की खेप गिराई जाती है। एक खेप की कीमत 10 करोड़ रुपये से लेकर 40 करोड़ रुपये तक हो सकती है, जो इस कारोबार की भयावहता को दर्शाती है। इसके बाद स्थानीय नेटवर्क के जरिए इन नशीले पदार्थों को जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग जिलों तक पहुंचाया जाता है। यह तस्करी अब पूरी तरह से संगठित नेटवर्क के जरिए संचालित होती है, जिसमें हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय होती है। हेरोइन, गांजा, भुक्की और नशीले कैप्सूल की सप्लाई सिर्फ बॉर्डर के जरिए ही नहीं, बल्कि पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों से भी हो रही है, जिससे इस नेटवर्क की पहुंच और भी व्यापक हो गई है।

जम्मू और श्रीनगर बन गए ड्रग तस्करी के हॉटस्पॉट

जम्मू और श्रीनगर, दोनों ही ड्रग तस्करी के प्रमुख केंद्र यानी हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं। 2025 में जम्मू में एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) के तहत 204 मामले दर्ज किए गए थे, जिसमें 309 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान लगभग 60 करोड़ रुपये की 15 किलो हेरोइन बरामद की गई थी, जो स्थानीय स्तर पर नशे के बढ़ते चलन का एक संकेत है।

वहीं, श्रीनगर में 2025 में 172 मामले दर्ज हुए, जिनमें छोटी से लेकर मध्यम और कमर्शियल स्तर की ड्रग्स की खेप शामिल थी। पुलिस ने पंजाब, कठुआ, उधमपुर और रजौरी तक फैले एक बड़े ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि ड्रग्स का यह जाल सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों तक भी इसकी पहुंच बन चुकी है।

नशे के इस कारोबार की सक्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2026 के पहले तीन महीनों में ही 88 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इन तीन महीनों में पुलिस ने 65 करोड़ रुपये से अधिक की 10 किलो से ज्यादा हेरोइन जब्त की है। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में चिंताजनक वृद्धि दिखाता है और इस बात को पुख्ता करता है कि ड्रग तस्कर अपने नेटवर्क को लगातार मजबूत करने में जुटे हैं।

हाल के बड़े मामले: सीमा पार से ड्रग्स की खेप

  • 22 मार्च 2026: मीरां साहिब क्षेत्र में पुलिस ने 262 ग्राम हेरोइन पकड़ी, जिसकी अनुमानित कीमत 1.5 करोड़ रुपये थी।
  • 10 मार्च 2026: आर.एस. पुरा सेक्टर में सीमा पार से ड्रोन के जरिए गिराई गई 1.5 किलो हेरोइन बरामद की गई।
  • 11 मार्च 2026: बिश्नाह के बहादुरपुर गांव से 2 किलो हेरोइन जब्त की गई, जिसकी बाजार कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये बताई गई।
  • 13 मार्च 2026: सुचेतगढ़ में भी ड्रोन से गिराई गई आधा किलो हेरोइन बरामद हुई।
  • 13 फरवरी 2026: कठुआ के नगरी क्षेत्र से 150 ग्राम हेरोइन के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
  • 14 फरवरी 2026: आर.एस. पुरा सेक्टर में सुरक्षाबलों ने 6.5 किलो हेरोइन की एक बड़ी खेप पकड़ी, जिसकी कीमत 40 करोड़ रुपये आंकी गई।

2025 के प्रमुख मामले:

  • 5 दिसंबर 2025: आर.एस. पुरा में 5 किलो हेरोइन बरामद हुई थी।
  • 27 अक्टूबर 2025: 5.3 किलो हेरोइन जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 35 करोड़ रुपये थी।
  • 15 नवंबर 2025: जम्मू पुलिस ने 3.2 किलो हेरोइन के साथ दो तस्करों को पकड़ा था, जिनके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े पाए गए थे।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नशे के इस कारोबार से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने में किया जा रहा है। ड्रोन से तस्करी, सीमा पार से फेंकी गई खेप और सड़क मार्ग से होने वाली सप्लाई जैसे कई तरीके अपनाए जा रहे हैं, जो सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद गंभीर चुनौती है। ऐसे में इस खतरे पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कार्रवाई, व्यापक जागरूकता अभियान और आम जनभागीदारी तीनों ही बेहद जरूरी हैं।

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