हिमाचल प्रदेश में करीब 1500 करोड़ रुपये के कथित चेस्टर हिल प्रोजेक्ट से जुड़े जमीन खरीद घोटाले का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। पहले श्रीकांत बाल्दी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे, अब राज्य के पूर्व मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस सरकार पर हमला बोला है और पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि इतने बड़े घोटाले के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
दरअसल बीजेपी के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक जमवाल ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की कि मामले में तुरंत सख्त कदम उठाए जाएं और दोषियों पर कार्रवाई हो।
बीजेपी ने साधा सुक्खू सरकार पर निशाना
जमवाल ने यह भी कहा कि अधिकारियों के बीच खुलेआम आरोप-प्रत्यारोप लगना प्रशासन में तालमेल की कमी और कमजोर नेतृत्व को दिखाता है। उनके मुताबिक प्रदेश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हो रहा है जब वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब वर्तमान मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुछ पूर्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
पूर्व रेरा चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी ने भी किया पलटवार
इसके बाद पूर्व रेरा चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी ने भी पलटवार करते हुए संजय गुप्ता के दो आदेशों को अवैध बताया और उन पर कार्रवाई की मांग की। बाल्दी का आरोप है कि सोलन के एसडीएम की एक जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया, जिसमें चेस्टर हिल प्रोजेक्ट की जमीन खरीद में कई गड़बड़ियों का जिक्र था। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम सोलन के उस आदेश को भी रद्द कर दिया गया, जिसमें अवैध निर्माण गिराने की बात कही गई थी। इस मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के वकील विनय शर्मा ने भी छोटा शिमला थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चेस्टर हिल प्रोजेक्ट में करीब 1500 करोड़ रुपये की जमीन खरीद में गड़बड़ी हुई है।
वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी इस मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मुख्य सचिव पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। यह मामला पहले ही हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है। अब लगातार नए आरोप सामने आने से विवाद और गहराता जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।






