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रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल हुई खत्म, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आश्वासन के बाद माने डॉक्टर्स

Written by:Rishabh Namdev
Published:
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में चल रही रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब खत्म हो चुकी है। यह हड़ताल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आश्वासन के बाद खत्म की गई है। अब हड़ताल समाप्त हो जाने से स्वास्थ्य सेवाएं फिर से बहाल होने की उम्मीद है।
रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल हुई खत्म, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आश्वासन के बाद माने डॉक्टर्स

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आश्वासन के बाद हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में चल रही रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म हो गई है। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने हड़ताल वापस लेने का फैसला कर लिया है और इस फैसले के साथ ही अस्पताल में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है।

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से प्रेस नोट जारी किया गया था, जिसमें बताया गया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 28 दिसंबर को आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया है कि डॉक्टर राघव नरूला की टर्मिनेशन को लेकर पुनर्विचार किया जाएगा। आश्वासन के बाद आरडीए ने जनहित में तत्काल प्रभाव से हड़ताल वापस लेने का निर्णय कर लिया है और सेवाएं बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है।

जांच प्रक्रिया में संगठन पूरी तरह से शामिल रहेगा

वहीं इस दौरान आरडीए की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जब तक डॉक्टर राघव नरूला का टर्मिनेशन आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक जांच प्रक्रिया में संगठन पूरी तरह से शामिल रहेगा। 3 जनवरी 2026 को इस पूरे मामले को लेकर अगली रणनीति पर बैठक की जाएगी और आगे का फैसला लिया जाएगा। वहीं इस दौरान रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने हड़ताल के दौरान समर्थन देने वाले प्रदेश और देशभर के डॉक्टर संगठनों का भी आभार जताया है। आरडीए ने सैमडकोट, हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन और अन्य मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है।

जानिए मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

बता दें कि डॉक्टरों की हड़ताल के चलते प्रदेश के अस्पतालों में ओपीडी, वार्ड और अन्य सेवाएं प्रभावित हुई थीं। अब हड़ताल के समाप्त हो जाने से ये सभी सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे मरीजों को राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वीडियो और तथ्यों के आधार पर सामने आए संबंधित डॉक्टर का मरीज के साथ व्यवहार ठीक नहीं था। सरकार किसी का करियर बर्बाद नहीं करना चाहती, बल्कि व्यवस्था को सही करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से फैसलों की समीक्षा कई बार की जाती है और जरूरत पड़ने पर उनमें सुधार भी किया जाता है। अगर आईजीएमसी जैसे बड़े संस्थान में इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहीं, तो लोगों का भरोसा इस अस्पताल से उठेगा और मरीज इलाज के लिए यहां आने से कतराएंगे।