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गगल पंचायत में फर्जी पंजीकरण का खुलासा, सुहागिन महिला ले रही विधवा पेंशन

Written by:Neha Sharma
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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की गगल पंचायत में फर्जी परिवार पंजीकरण का मामला लगातार गहराता जा रहा है। ताजा जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 250 लोग फर्जी तरीके से परिवार रजिस्टर में दर्ज कर स्थानीय निवासी बन गए।
गगल पंचायत में फर्जी पंजीकरण का खुलासा, सुहागिन महिला ले रही विधवा पेंशन

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की गगल पंचायत में फर्जी परिवार पंजीकरण का मामला लगातार गहराता जा रहा है। ताजा जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 250 लोग फर्जी तरीके से परिवार रजिस्टर में दर्ज कर स्थानीय निवासी बन गए। इन पंजीकरणों के आधार पर कई परिवारों को योजनाओं का लाभ भी मिल चुका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि एक सुहागिन महिला, जिसकी शादी नेरटी में हुई है और जिसका मायका गगल में है, वह गगल पंचायत से विधवा पेंशन ले रही है। हैरानी की बात यह है कि महिला का पति जिंदा है और तलाक भी नहीं हुआ है, बावजूद इसके वह योजना का लाभ उठा रही है।

पंचायत जांच में पता चला है कि उक्त महिला का नाम मायके और ससुराल दोनों जगह के परिवार रजिस्टर में दर्ज है। जबकि नियमों के अनुसार शादी के बाद महिला का नाम मायके से हटाकर केवल ससुराल की पंचायत में दर्ज होना चाहिए। इस गड़बड़ी के चलते न केवल पंचायत व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं बल्कि योजनाओं के लाभ के दुरुपयोग का भी मामला सामने आया है। सोमवार को गगल पंचायत के प्रतिनिधियों ने इस मामले को लेकर विकास खंड अधिकारी (बीडीओ) धर्मशाला से मुलाकात की। पंचायत जांच में सामने आया है कि परिवार रजिस्टर में पंजीकृत 29 परिवारों में से चार गगल में रहते ही नहीं हैं।

फर्जी पंजीकरण का खुलासा

इस पूरे मामले ने पंचायत की कार्यप्रणाली और पूर्व प्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गगल पंचायत की मौजूदा प्रधान रेणु पठानिया और उपप्रधान भुवनेश चड्डा का आरोप है कि पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों ने वोट बैंक की राजनीति के लिए यह गड़बड़ी की थी। यही कारण है कि बिना जांच-पड़ताल के कई परिवारों को फर्जी पंजीकरण कर योजनाओं का लाभ दिलाया गया। मौजूदा समय में खंड विकास अधिकारी धर्मशाला इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं और अब तक 18 परिवारों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।

वर्तमान स्थिति यह है कि जांच में चार परिवारों का गगल में न रहना साबित हो चुका है, जबकि पांच परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं। बाकी मामलों में जांच जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे फर्जी पंजीकरण न केवल सरकारी योजनाओं के संसाधनों की बर्बादी हैं बल्कि वास्तविक हकदारों के अधिकारों का हनन भी करते हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की पूरी तरह जांच होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।