हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण मंत्री (PWD) विक्रमादित्य सिंह के IAS-IPS अधिकारियों पर दिए बयान से शुरू हुआ विवाद अब सरकार के भीतर बड़ी दरार का कारण बन गया है। सुक्खू कैबिनेट इस मुद्दे पर दो गुटों में बंट गई है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य सिंह का समर्थन करते हुए उन्हें ‘कुशल मंत्री’ बताया है और मुख्यमंत्री से उनके उठाए मुद्दों को स्पष्ट करने का आग्रह किया है।
यह समर्थन विक्रमादित्य के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे पहले तीन मंत्री सार्वजनिक रूप से उनके बयान की आलोचना कर चुके थे। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली में इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि मंत्रियों और अफसरों के बीच कोई विवाद नहीं है और सभी अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं।
रोहित ठाकुर ने किया विक्रमादित्य का बचाव
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य सिंह का पक्ष लेते हुए कहा कि प्रदेश के विकास में अधिकारियों का योगदान अहम है, लेकिन कुछ लोगों में नकारात्मक सोच हो सकती है, चाहे वे बाहरी राज्यों से हों या प्रदेश से। उन्होंने कहा, “विक्रमादित्य सिंह ने जो मुद्दे उठाए हैं, उन पर मुख्यमंत्री को स्थिति साफ करनी चाहिए और उनकी शंकाओं को दूर करना चाहिए।” रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य को एक ‘एफ़िशिएंट मंत्री’ भी करार दिया।
तीन मंत्री कर चुके हैं विरोध
रोहित ठाकुर से पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विक्रमादित्य के बयान को गलत ठहराया था। अनिरुद्ध सिंह ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर कोई मंत्री काम नहीं करवा पा रहा है तो यह उसकी कार्यशैली की कमी हो सकती है। इस पर विक्रमादित्य ने भी पलटवार करते हुए NHAI अधिकारियों से मारपीट की पुरानी घटना की याद दिलाई थी, जिसमें अनिरुद्ध सिंह का नाम आया था।
CM ने कहा- कोई विवाद नहीं
गुरुवार शाम दिल्ली में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पूरे विवाद को ज्यादा तवज्जो न देने की बात कही। उन्होंने कहा, “मंत्री और अफसरों के बीच कोई विवाद नहीं है। कई बार ऐसी बातें होती हैं, लेकिन इन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं। सभी अधिकारी अच्छी तरह से काम कर रहे हैं।”
क्या था पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत सोमवार को PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह की एक फेसबुक पोस्ट से हुई थी। उन्होंने लिखा था कि यूपी-बिहार के कुछ आला IAS-IPS अधिकारी हिमाचल में ‘हिमाचलियत’ की धज्जियां उड़ा रहे हैं और शासक बनने की कोशिश कर रहे हैं।
“हम बाहर के राज्य के अधिकारियों का पूर्णत: सम्मान करते हैं, पर उन्हें हिमाचली अधिकारियों से सीख लेने की आवश्यकता है। जब तक हिमाचल में हो, हिमाचल के लोगों की सेवा करो, शासक बनने की गलती न करें।” — विक्रमादित्य सिंह, PWD मंत्री
इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया। IAS और IPS एसोसिएशन ने अलग-अलग बैठकें कर मंत्री के बयान की निंदा की। IPS एसोसिएशन ने तो सरकार से मांग कर दी कि उन्हें विक्रमादित्य सिंह के साथ ड्यूटी पर न लगाया जाए। एसोसिएशन ने उनके बयान को ‘विभाजनकारी’ और ‘प्रशासनिक रूप से नुकसानदेह’ बताया।
19 जनवरी की कैबिनेट बैठक पर नजरें
मंत्रियों के बीच बढ़ते टकराव और अधिकारियों की नाराजगी के बीच अब सबकी नजरें 19 जनवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिक गई हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा है कि इस मुद्दे पर कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। इस बैठक में सरकार इस विवाद को खत्म करने की कोई राह निकाल सकती है।





