हिमाचल प्रदेश में लाखों कर्मचारी महंगाई भत्ते (डीए) का इंतजार कर रहे हैं। बजट सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा 3 फीसदी डीए देने की घोषणा के बावजूद अब तक कर्मचारियों को लाभ नहीं मिल पाया है। इस देरी को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है और विधानसभा में भी यह मुद्दा जमकर उठा। अब संयुक्त कर्मचारी महासंघ और हिमाचल अध्यापक संघ ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द डीए जारी नहीं किया गया तो कर्मचारी बड़े आंदोलन की राह पकड़ेंगे।

हिमाचल में कर्मचारियों का डीए पर रोष

शनिवार को शिमला में पत्रकार वार्ता करते हुए हिमाचल अध्यापक संघ के अध्यक्ष एवं संयुक्त कर्मचारी महासंघ के नेता वीरेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार आर्थिक स्थिति का हवाला देकर डीए रोकने का काम न करे। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के 13 प्रतिशत डीए की किस्त लंबित है और कर्मचारियों को इस वजह से भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। चौहान ने सवाल उठाया कि जब सरकार कहती है कि वित्तीय संकट नहीं है, तो कर्मचारियों का हक क्यों नहीं दिया जा रहा।

चौहान ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते डीए जारी नहीं किया तो कर्मचारी संगठित होकर सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने शिक्षा विभाग की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि हजारों पद शिक्षकों के खाली पड़े हैं। नई भर्तियां न होने से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है और ऐसे में स्कूल बंद करना समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शीघ्र भर्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाए।

विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा था कि प्रदेश की वित्तीय हालत ठीक नहीं है, इसलिए डीए की किश्त अभी जारी नहीं की जा सकी है। सीएम ने आश्वासन दिया था कि जैसे ही वित्तीय स्थिति बेहतर होगी, कर्मचारियों को लंबित डीए दे दिया जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि बीते 10 वर्षों से सरकार पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारी कर्मचारियों की बाकी है। ऐसे में कर्मचारियों की नाराजगी आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।