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आज जारी होगा हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश पर रिजर्वेशन रोस्टर, DC की 5% आरक्षण शक्ति रद्द

Written by:Banshika Sharma
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हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। दरअसल हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी जिलों के डीसी आज शाम 5 बजे तक पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर हर हाल में जारी करें। हालांकि डीसी को दी गई 5% अतिरिक्त आरक्षण तय करने की शक्तियों को अदालत ने रद्द कर दिया है, जिसके कारण कई जिलों में रोस्टर नए सिरे से तैयार करना पड़ेगा।
आज जारी होगा हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश पर रिजर्वेशन रोस्टर, DC की 5% आरक्षण शक्ति रद्द

हिमाचल हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद प्रदेश के सभी जिलों में पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। दरअसल अदालत ने स्पष्ट कहा है कि तय समय सीमा के भीतर रोस्टर जारी किया जाना चाहिए, ताकि लंबे समय से लंबित पंचायत चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। वहीं इस आदेश से उन लाखों मतदाताओं और संभावित उम्मीदवारों को राहत मिली है जो चुनाव की घोषणा का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

दरअसल हालांकि इस प्रक्रिया के बीच एक बड़ी अड़चन भी सामने आई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा डीसी को दी गई 5% अतिरिक्त आरक्षण तय करने की शक्तियों को गैरकानूनी बताते हुए तुरंत रद्द कर दिया है। यह अतिरिक्त आरक्षण सामान्य वर्ग की महिलाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े कुछ मामलों के लिए तय किया गया था। अब इसे लागू नहीं किया जा सकेगा।

सभी जिलों में जारी रोस्टर को अब दोबारा तैयार करना पड़ेगा

इस फैसले का सीधा असर उन जिलों पर पड़ा है जहां डीसी ने हाल ही में इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया था। अदालत के आदेश के बाद ऐसे सभी जिलों में जारी रोस्टर को अब दोबारा तैयार करना पड़ेगा। इससे चुनाव तैयारियों में कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है और संभावित उम्मीदवारों के बीच असमंजस की स्थिति भी बन सकती है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि आरक्षण रोस्टर तैयार करने में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अब डीसी को पंचायतों के वार्ड और प्रधान पदों के लिए आरक्षण तय करने की पूरी प्रक्रिया नए सिरे से करनी होगी, जिसमें 5% अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान शामिल नहीं किया जाएगा। अदालत का मानना है कि यह कदम चुनाव प्रक्रिया को कानूनी रूप से सही और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनावों की समयसीमा राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनाव 31 मई से पहले कराए जाएं। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद सरकार पर इस डेडलाइन को पूरा करने का दबाव और बढ़ गया है।

73 नगर निकायों में भी चुनाव प्रस्तावित

दरअसल प्रदेश में पंचायतों के साथ-साथ 73 नगर निकायों में भी चुनाव प्रस्तावित हैं। फिलहाल इन सभी स्थानीय निकायों में सरकार ने प्रशासक नियुक्त कर रखे हैं। ज्यादातर नगर निकायों का कार्यकाल 17 जनवरी 2026 को और पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका था, जिसके बाद से चुनाव लंबित चल रहे हैं।

पिछले साल जब इन स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने वाला था, तब राज्य चुनाव आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार था। लेकिन राज्य सरकार ने आपदा का हवाला देते हुए चुनाव टालने का फैसला किया था। इस फैसले पर राजनीतिक दलों और जनता ने सवाल भी उठाए थे। चुनाव टलने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति की गई, जिससे स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधित्व और विकास कार्यों पर असर पड़ा।

यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब हाईकोर्ट ने पहले 30 अप्रैल 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने का आदेश दिया था। राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने की अतिरिक्त मोहलत देते हुए 31 मई तक चुनाव कराने की समयसीमा तय कर दी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही राज्य सरकार ने आरक्षण रोस्टर के नियमों में बदलाव किया था और डीसी को 5 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण तय करने की शक्तियां दी थीं। लेकिन अब हाईकोर्ट ने उस प्रावधान को ही रद्द कर दिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ रही है।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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