हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ते पेपर लीक मामलों पर सख्ती दिखाते हुए इसे गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में डालने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में इस संबंध में नया विधेयक पेश किया है, जिसे मंगलवार को पारित किया जाएगा। इस विधेयक में प्रावधान है कि पेपर लीक जैसे अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं, यदि किसी सर्विस प्रोवाइडर की संलिप्तता पाई जाती है, तो उस पर एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा और चार साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। संगठित अपराध की स्थिति में पांच साल तक की सजा के साथ एक करोड़ रुपए तक का आर्थिक दंड भी देना होगा। इन मामलों की जांच डीएसपी से नीचे का कोई अधिकारी नहीं कर सकेगा।

पेपर लीक अब गैर-जमानती अपराध

विधेयक के अनुसार, लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग से होने वाली सभी भर्तियां इसके दायरे में रहेंगी। अपराध की परिभाषा में प्रश्नपत्र या आंसर शीट लीक करना, उन्हें साझा करना, उत्तर पुस्तिका को कब्जे में रखना या उनमें छेड़छाड़ करना शामिल है। गोपनीय सूचनाओं को लीक करना भी अपराध माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इस सख्त प्रावधान से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर रोक लगेगी और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।

इसके साथ ही विधानसभा में दो अन्य विधेयक भी पेश किए गए। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अनुपस्थिति में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने ‘रजिस्ट्रीकरण विधेयक’ सदन में रखा, जिसके तहत अब राजस्व सेवाओं को ऑनलाइन किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने ‘सर्टेन गुड्स केरियर रोड टैक्सेशन’ में बदलाव के लिए भी एक बिल सदन में रखा। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से प्रशासनिक कामकाज और सुगम होगा।

इसके अलावा विधानसभा ने एक और अहम बिल पास किया है, जिसके तहत राज्य में पब्लिक यूटिलिटी के लिए दान की गई जमीन पर किसी तरह का विवाद नहीं खड़ा किया जा सकेगा। यदि इस तरह की जमीन बिना गिफ्ट डीड या एग्रीमेंट के भी 10 साल से अधिक समय से सार्वजनिक उपयोग में है, तो उस पर कोई दावा या मुआवजे की मांग नहीं की जा सकेगी। ऐसा करने वालों को छह महीने की कैद और 10 हजार रुपए तक के जुर्माने का सामना करना होगा। सरकार का कहना है कि इस प्रावधान से विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक उपयोग के कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी।