शिमला: हिमाचल प्रदेश में बढ़ते सिंथेटिक ड्रग्स (चिट्टा) के खतरे से निपटने के लिए सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। राज्य सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में यह तय किया गया कि अब ‘चिट्टे’ के काले कारोबार में संलिप्त लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत, जिन लोगों के खिलाफ सिंथेटिक ड्रग्स से जुड़े मामलों में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है, उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए अदालत से दोषी ठहराए जाने का इंतजार नहीं किया जाएगा। केवल चार्जशीट दाखिल होना ही अयोग्यता के लिए पर्याप्त आधार होगा। सरकार का मानना है कि यह कदम जमीनी स्तर पर राजनीति को नशा मुक्त और स्वच्छ बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। इस फैसले को कानूनी रूप देने के लिए राज्य सरकार आगामी विधानसभा सत्र में एक विधेयक पेश करेगी।
पंचायत चुनावों पर बड़ा असर
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। वर्तमान में परिसीमन, मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण और आरक्षण रोस्टर तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, राज्य में 31 मई से पहले पंचायत चुनाव संपन्न कराए जाने हैं। सरकार के इस कदम से पंचायत राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि और नशा कारोबारियों के प्रवेश पर रोक लगने की उम्मीद है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि मादक पदार्थ निषेध अधिनियम (NDPS) के तहत अन्य (गैर-सिंथेटिक) मामलों के आरोपियों को फिलहाल इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधार की पहल
कैबिनेट बैठक में सिर्फ नशाखोरी पर ही नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई अहम निर्णय लिए गए।
शिक्षा व्यवस्था: प्रदेश में सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध सरकारी स्कूलों के लिए अब एक अलग कैडर बनाया जाएगा। पहले इस योजना के लिए 134 स्कूल चुने गए थे, जिनकी संख्या अब बढ़ाकर 151 कर दी गई है।
चिकित्सा सुविधाएं: स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुए राज्य के तीन प्रमुख मेडिकल कॉलेजों आईजीएमसी (शिमला), हमीरपुर मेडिकल कॉलेज और नेर चौक मेडिकल कॉलेज में नए ‘बायो फिजिक्स विभाग’ खोलने को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए एक अत्याधुनिक पेट स्कैन (PET Scan) मशीन की खरीद को भी हरी झंडी मिल गई है। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों में इंटर-कॉलेज बनाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृत किया गया है।
रसोई गैस की किल्लत से मिलेगी निजात
प्रदेशवासियों को भविष्य में रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने ‘सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम’ को और मजबूत करने का फैसला किया है। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य घरेलू गैस की आपूर्ति को सुचारू और निर्बाध बनाना है। यह कदम राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।





