हिमाचल सरकार ने राज्य में एंट्री टैक्स बढ़ाने के अपने फैसले पर फिलहाल कदम पीछे खींच लिए हैं। पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा के कड़े विरोध के बाद, हिमाचल सरकार ने पांच, सात और बारह सीटर गाड़ियों पर पुरानी एंट्री टैक्स दरें लागू करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, एंट्री टैक्स वृद्धि को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार सुबह आठ बजे तक के लिए स्थगित हो गया है, क्योंकि सरकार नई अधिसूचना को वापस लेने की प्रक्रिया में जुट गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सीमावर्ती जिलों को पूरी छूट नहीं मिलती, संघर्ष जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र में एंट्री टैक्स के ‘युक्तिकरण’ का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि पहले पांच सीटर गाड़ी का एंट्री टैक्स 70 रुपये और 6 से 12 सीटर गाड़ी का 110 रुपये था। सरकार ने दोनों तरह की गाड़ियों के लिए अब इसे 130 रुपये करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, पूर्व सरकार ने पांच सीटर गाड़ियों पर टोल टैक्स 70 से बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया था, ऐसा मुख्यमंत्री ने सदन में बताया।
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नई व्यवस्था में मासिक रियायती पास की दरें पांच सीटर गाड़ी के लिए 70 रुपये और 6 से 12 सीटर गाड़ी के लिए 110 रुपये तय की गई थीं। टोल बैरियर की पांच किलोमीटर की परिधि में रहने वाले हिमाचल और पड़ोसी राज्यों के सभी लोगों के लिए ये मासिक पास बनने थे। पास जारी करने की शक्तियां पंजाब व हरियाणा में संबंधित एसडीएम को, जबकि हिमाचल में तहसीलदार को दी जानी थीं। पास जारी करने की फीस पर जल्द फैसला होने की बात कही गई थी।
विधानसभा में एंट्री टैक्स का उठा मुद्दा
विधानसभा में भी एंट्री टैक्स का मुद्दा उठा। व्यवस्था के प्रश्न के दौरान सदस्य सतपाल सत्ती ने एंट्री टोल टैक्स की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार इसमें अपनी जेब भर रहे हैं। सत्ती ने यह भी कहा कि हर साल रिश्तेदारियों के नाम पर नई कंपनियां बना दी जाती हैं, जिससे पारदर्शिता और सही संचालन पर असर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए, जिन पर पहले आरोप थे, उन्हें अब अच्छे पदों पर तैनात किया जा रहा है।
विधानसभा परिसर में भाजपा विधायकों का प्रदर्शन
एंट्री टैक्स वृद्धि और पेट्रोल-डीजल पर सेस लगाने के फैसले के विरोध में भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर की अगुवाई में भाजपा विधायकों ने सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताया और विधानसभा के मुख्य गेट तक मार्च करते हुए नारेबाजी की। जयराम ठाकुर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार जहां मिडिल ईस्ट के हालात देखकर देश में नागरिकों को पेट्रोल और डीजल के दाम में दस रुपये वैट घटाकर राहत दे चुकी है, वहीं हिमाचल में सुक्खू सरकार ऐसे फैसले ले रही है जो प्रदेश की जनता की कमर तोड़ रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि छोटी गाड़ियों पर लगने वाले एंट्री टैक्स को 70 रुपये से बढ़ाकर सीधे 170 रुपये और बड़ी गाड़ियों के लिए इसे एक हजार रुपये तक कर दिया गया है। उन्होंने इसे तर्कहीन और पर्यटन पर आधारित हिमाचल की अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती कदम बताया। नेता विपक्ष ने चिंता जताई कि सीमावर्ती जिलों के निवासियों के लिए यह निर्णय दैनिक आर्थिक उगाही जैसा बोझ बन जाएगा, जिससे आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां ठप होने की कगार पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में एक्ट पास कर पेट्रोल और डीजल में पांच रुपये विधवा और अनाथ सेस लगाकर जनता पर भारी बोझ लादने की तैयारी है।
इन फैसलों की गूंज पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा तक पहुंच गई है। इन राज्यों के लोग और ट्रांसपोर्टर इस वृद्धि के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर एंट्री टैक्स वापस नहीं लिया गया तो 31 मार्च की रात से प्रदेश में वाहनों का प्रवेश बंद कर चक्का जाम किया जाएगा, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता था।
हिमाचल सरकार ने पुरानी टैक्स दरें लागू करने का लिया निर्णय
इस दबाव के बाद, प्रदर्शनकारियों ने अपना संघर्ष बुधवार सुबह 8 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। हिमाचल सरकार ने पांच, सात और बारह सीटर वाहनों पर पुरानी टैक्स दरें लागू करने का निर्णय लिया है। हिमाचल सरकार ने नई नोटिफिकेशन को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि, पंजाब के आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सीमा से लगे जिलों को पूरी तरह छूट नहीं मिलती, संघर्ष जारी रहेगा। उनकी मांग है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं तब तक टोल फ्री कर दिया जाए।
पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा और पूर्व डीआईजी दलजीत सिंह राणा ने दावा किया कि आंदोलन के दबाव में हिमाचल सरकार पीछे हटने लगी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन के कारण पंजाब के लोगों के करीब 50 करोड़ रुपये की जबरन वसूली रुक गई है। इसे उन्होंने अपनी आंशिक जीत बताया, लेकिन कहा कि पूरी जीत अभी बाकी है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हिमाचल सरकार यातायात सामान्य करना चाहती है तो पंजाब से लगते सभी 33 एंट्री टैक्स नाकों को तुरंत फ्री किया जाए और टैक्स वसूली बंद की जाए। अन्यथा 1 अप्रैल से पंजाब-हिमाचल सीमा पर पूर्ण चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ निजी वाहनों की नहीं है, बल्कि टैक्सी चालकों, ट्रक यूनियनों और किसानों की भी है, जो इस गैर वाजिब टैक्स के खिलाफ एकजुट हुए हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि रूपनगर, पठानकोट, होशियारपुर और मोहाली जैसे सीमा से जुड़े जिलों को पूरी तरह छूट दी जाए। इस मौके पर पूर्व डीआईजी जेल दलजीत सिंह राणा, किरती किसान मोर्चा के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह भुट्टो सहित कई नेता मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि जब तक एंट्री टैक्स पूरी तरह खत्म नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा।