हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को एक अहम बदलाव किया गया। सदन में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अनुपस्थिति में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश रजिस्ट्रीकरण संशोधन विधेयक पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस संशोधन के बाद अब प्रदेश के लोग घर बैठे जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल करा सकेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अब लोगों को पटवारियों और राजस्व कार्यालयों में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
घर बैठे होगी जमीन की रजिस्ट्री
सीएम ने बताया कि राज्य सरकार ने “माई डीड” पोर्टल के माध्यम से यह सुविधा शुरू की है। रजिस्ट्रीकरण ऑनलाइन और पूरी तरह पेपरलेस होगा। इसमें डिजिटल हस्ताक्षर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया जाएगा। अगर इंटरनेट बाधित होता है तो सैटेलाइट सेवाओं से मदद ली जाएगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और राजस्व कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
इसी सत्र में हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संशोधन विधेयक भी पारित किया गया। नए प्रावधानों के तहत भ्रष्टाचार में संलिप्त जन प्रतिनिधि पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई प्रधान ठेकेदारी करता है या अपने परिवार को ठेके दिलवाता है और शिकायत पर आरोप सही पाए जाते हैं, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे।
पंचायतीराज संशोधन विधेयक में कई नए बदलाव किए गए हैं। अब पंचायतें 25 हजार रुपये तक के व्यय से संबंधित मामलों की सुनवाई कर सकेंगी, जबकि पहले यह सीमा सिर्फ दो हजार रुपये थी। इसके अलावा जिन लोगों का नाम दो ग्राम सभा समितियों में दर्ज है, उनका नाम अब केवल एक जगह रखा जाएगा। ग्राम सभा बुलाने का अधिकार भी निदेशक को दिया गया है। यह विधेयक संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान द्वारा प्रस्तुत किया गया और ध्वनिमत से पारित हो गया।





