हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में नदी-नालों के किनारे निर्माण पर रोक, कैबिनेट ने बनाए नए नियम

हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में तय किया गया कि अब राज्य के गांवों में नदी-नालों के किनारे भवन निर्माण नहीं होंगे।
Chief Minister Sukhvinder Singh Sukhu

हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में तय किया गया कि अब राज्य के गांवों में नदी-नालों के किनारे भवन निर्माण नहीं होंगे। इसके साथ ही किसी भी तरह का निर्माण अब नियमों के तहत ही संभव होगा। भवन बनाने से पहले नक्शों की मंजूरी लेना अनिवार्य होगी। पंचायतों में तकनीकी सहायक इन नक्शों की जांच करेंगे, जरूरत पड़ने पर किसी जांच एजेंसी की मदद भी ली जाएगी। इसके बाद भवन निर्माण के लिए नक्शों को ग्रामसभा की स्वीकृति मिलनी होगी। मंत्रिमंडल का यह निर्णय हाल ही में मानसून के दौरान हुई तबाही और अमर उजाला के ‘कराहते पहाड़’ अभियान के बीच लिया गया है।

नए मॉडल उप नियमों के तहत भवनों की स्वीकृति प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। 500 वर्ग मीटर तक के भवनों के नक्शे सिंगल लाइन स्केच पर मंजूर होंगे, जबकि 1000 वर्ग मीटर तक के प्लॉट के नक्शे डबल लाइन में स्वीकृत किए जाएंगे। डबल लाइन नक्शे में रसोई और कमरों का स्थान स्पष्ट करना होगा। पिछले दो वर्षों में भारी बारिश और बाढ़ से राज्य को बड़े पैमाने पर नुकसान झेलना पड़ा है। वर्ष 2023 और 2024 के मानसून में कई गांव तबाह हुए और ढेरों मकान ढह गए। सिर्फ इस बार की आपदा में 579 पक्के और 89 कच्चे मकान पूरी तरह गिर गए। नुकसान का बड़ा कारण नदियों-नालों के किनारे अनियोजित निर्माण और भूस्खलन बताया गया।

कैबिनेट ने बनाए नए नियम

भूस्खलन और इमारतों के ढहने से बचाव के लिए विशेषज्ञ लंबे समय से नियमबद्ध निर्माण पर जोर दे रहे थे। सरकार ने माना है कि सुरक्षित जल निकासी व्यवस्था और मजबूत नींव के बिना इमारतें आपदा की चपेट में आ जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित भवन निर्माण ने खतरा और बढ़ा दिया है। अब नए नियमों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्रामीण इलाकों में भी योजनाबद्ध निर्माण हो और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति को कम किया जा सके। यह भी उल्लेखनीय है कि पहले से ही 1000 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण के लिए ग्राम एवं नगर नियोजन विभाग की मंजूरी अनिवार्य है।

पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि ग्रामीण इलाकों के लिए बनाए गए इन मॉडल उप नियमों में स्थानीय जनता के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास योजनाबद्ध ढंग से हो, ताकि लोगों की सुरक्षा और सुविधा दोनों सुनिश्चित हों। मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई, जिससे आने वाले समय में ग्रामीण इलाकों में अनियोजित निर्माण पर रोक लगेगी और आपदा प्रबंधन की दिशा में मजबूती आएगी।

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