
हिमाचल प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा केंद्र के नए ‘विकसित भारत ग्रामीण आजीविका गारंटी’ (वी.बी.जी.आर.जी.) बिल के विरोध में किए गए अनशन पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस अनशन को कांग्रेस आलाकमान को खुश करने के लिए की जा रही ‘सियासी नौटंकी’ करार दिया है।
जयराम ठाकुर ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि सुक्खू सरकार मनरेगा के नाम पर सिर्फ घड़ियाली आंसू बहा रही है, जबकि उसकी अपनी नीयत और नीतियां विकास विरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अनशन केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
‘दोहरा मापदंड अपना रही सरकार’
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री सुक्खू पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार प्रधानों के अधिकारों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आपदा अधिनियम की आड़ में पंचायत चुनाव रोककर पंचायतों को प्रशासकों के हवाले कर दिया है।
“सभी जगह काम ठप पड़े हैं और गांव की सरकार कहे जाने वाले पंचायती राज सिस्टम को इन्होंने हाशिए पर धकेल दिया है। ऐसी स्थिति में मनरेगा के काम कैसे होंगे, उन्हें कौन कराएगा?” — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
ठाकुर ने दावा किया कि सुक्खू सरकार की इन हरकतों से स्पष्ट है कि मनरेगा को लेकर उनकी चिंता केवल दिखावा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनशन में भीड़ जुटाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया और बसों के जरिए लोगों को लाया गया।
आंकड़ों से सरकार को घेरा
जयराम ठाकुर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जो सरकार पिछले छह महीनों में प्रदेश की 655 पंचायतों में मनरेगा के तहत एक दिन का भी रोजगार नहीं दे पाई, वह किस नैतिकता से रोजगार की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने गृह जिले में भी बजट खर्च करने में नाकाम रहे हैं।
इसके विपरीत, उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि मनरेगा का बजट 33 हजार करोड़ से बढ़ाकर 90 हजार करोड़ रुपये किया गया और मनमोहन सरकार की तुलना में दोगुने से अधिक कार्य दिवस सृजित किए गए।
नई व्यवस्था से क्यों असहज है कांग्रेस?
जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार का नया कानून पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार खत्म करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा, “इसमें डिजिटाइजेशन और बायोमेट्रिक हाजिरी के कारण बिचौलियों के लिए कोई जगह नहीं बची है। भ्रष्टाचार पर पूर्ण विराम लगेगा।”
उन्होंने कटाक्ष किया कि सुक्खू सरकार नई व्यवस्था से इसलिए असहज है क्योंकि इसमें 100 के बजाय 125 दिन के रोजगार की गारंटी, वित्तीय अनुशासन और उच्च गुणवत्ता वाले कार्यों का प्रावधान है।
गांधी परिवार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस पर महात्मा गांधी के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 80 के दशक में ग्रामीण रोजगार योजना शुरू हुई तो उसका नाम जवाहरलाल नेहरू के नाम पर क्यों रखा गया? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को महात्मा गांधी की याद तभी आती है जब उसे राजनीति करनी होती है, जबकि हकीकत में वह केवल गांधी परिवार को ही प्राथमिकता देती है।
4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

