रक्षाबंधन पर आमतौर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती हैं। लेकिन इस बार सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में राखी का यह धागा बाघों और जंगल की सुरक्षा से जोड़ दिया गया।
यहां वन विभाग ने ‘बाघ रक्षा सूत्र’ नाम से खास अभियान चलाया। तीन दिनों तक चले इस अभियान में अब तक 11 हजार लोगों को बाघ वाली राखी बांधी गई और उनसे वन्यजीवों की सुरक्षा की शपथ ली गई।
रक्षाबंधन पर सतपुड़ा में ‘बाघ रक्षा सूत्र’ अभियान
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में रक्षाबंधन के मौके पर पहली बार ‘बाघ रक्षा सूत्र’ अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को बाघ और दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जागरूक करना है।
जिस तरह रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वादा करता है, उसी भावना को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ा गया। ग्रामीणों और बच्चों की कलाई पर बाघ वाली राखी बांधी गई और उनसे जंगल तथा वन्यजीवों की रक्षा में सहयोग करने का संकल्प लिया गया।
इस दौरान लोगों को बताया गया कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं है। जंगल में रहने वाले हर जानवर का अपना महत्व है। इनमें बाघ एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसका असर पूरे जंगल के संतुलन पर पड़ता है।
तीन दिन में 11 हजार लोगों को बांधी गई राखी
‘बाघ रक्षा सूत्र’ अभियान को लेकर ग्रामीणों और बच्चों में अच्छा उत्साह देखने को मिला। रेंजर विलास डोंगरे के अनुसार, तीन दिनों में करीब 11 हजार लोगों को बाघ रक्षा सूत्र बांधा गया। इसमें 50 विस्थापित गांवों के लोग भी शामिल हुए। इसके अलावा स्कूली विद्यार्थियों, ईको विकास समिति के सदस्यों और वन मित्रों ने भी अभियान में हिस्सा लिया।
अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों को बाघ वाली राखी बांधने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। इस दौरान बच्चों और ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि जंगल में रहने वाले जानवरों को नुकसान पहुंचाने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ सकता है। वन विभाग ने इस अभियान को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय लोगों की भागीदारी से जोड़ने की कोशिश की है।
बाघ सिर्फ जानवर नहीं, जंगल का सुरक्षा कवच
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने अभियान को लेकर कहा कि बाघ सिर्फ एक जानवर नहीं है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम का सुरक्षा कवच है।
उनका कहना है कि अगर बाघ सुरक्षित रहेगा तो जंगल भी सुरक्षित रहेंगे और जंगल बचेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। इसी सोच के साथ रक्षाबंधन के त्योहार को बाघ संरक्षण से जोड़ा गया।
बाघ जंगल की खाद्य श्रृंखला में सबसे ऊपर रहने वाले प्रमुख वन्यजीवों में शामिल है। जंगल में हिरण और दूसरे शाकाहारी जानवरों की संख्या को संतुलित रखने में उसकी भूमिका होती है। इसलिए बाघों का संरक्षण केवल बाघों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध पूरे जंगल से है।
बागड़ा, पिपरिया, तवा और मटकुली में चला अभियान
यह अभियान सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अलग-अलग क्षेत्रों में चलाया गया। बागड़ा बफर, पिपरिया बफर, तवा बफर और मटकुली क्षेत्र में लोगों को ‘बाघ रक्षा सूत्र’ बांधा गया।
इन इलाकों में बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगल और उसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में वन विभाग के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी वन्यजीव संरक्षण में काफी अहम मानी जाती है।
अभियान के दौरान लोगों से कहा गया कि जंगल में रहने वाले वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहें और किसी भी तरह की परेशानी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी वन विभाग तक पहुंचाएं।






