
Dhanteras 2025
हिंदू धर्म में धनतेरस (Dhanteras 2025) का त्योहार बेहद की शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की की पूजा विधि-विधान से की जाती है। आज के दिन विशेष रूप से धन से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अगर आप भी धनतेरस पर कुछ खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए हैं। लोग बाजारों से सोने-चांदी के आभूषण, नया वाहन, प्रॉपट्री, बर्तन ज्यादातर खरीदते हैं। लेकिन मान्यताओं के अनुसार कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं, जिन्हें धनतेरस के दिन भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि इन वस्तुओं को घर लाने से दरिद्रता का वास एवं मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।
तेल और घी- धनतेरस के दिन तेल या घी खरीदना धनतेरस (Dhanteras 2025) के दिन अशुभ माना जाता है। साथ ही इस बार धनतेरस शनिवार यानि आज के दिन है। शनिवार को भी तेल खरीदना अशुभ माना गया है। धनतेरस को भूलकर भी तेल और घी की खरीदारी न करें। अगर किसी को ऐसी किसी सामग्री की जरूरत है तो उसे एक दिन पहले या बाद में खरीद लेना चाहिए।
जूते-चप्पल और चमड़ा- धनतेरस पर जूते-चप्पल और चमड़ा से बनी वस्तुएं जैसे बेल्ट, बैग, पर्स आदि चीजों को नहीं खरीदना चाहिए। क्योंकि जूते शनि से संबन्धित हैं इसलिए शनि से संबंधित कोई भी वस्तु खरीदना शुभ नहीं माना जाता है। साथ ही धनतेरस के दिन इन वस्तुओं से आप जितना दूर रहें उतना ठीक रहता है।
काली वस्तु- धनतेरस पर अगर आप काले कलर की वस्तु खरीदने की सोच रहे हैं तो अभी मन बदल दीजिए। क्योंकि धनतेरस पर काले कलर की वस्तु खरीदना अत्यंत अशुभ माना गया है। काला रंग भगवान शनि का प्रतीक भी माना गया है जिस वजह से काले रंग की वस्तु खरीदना उचित नहीं है।
स्टील-कांच के बर्तन- धनतेरस पर बर्तनों की खरीदारी ज्यादा होती है लेकिन क्या आपको पता है कि धनतेरस पर स्टील और कांच के बर्तन बिल्कुल भी नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि कांच के बर्तन आमतौर पर राहु से संबंधित होते हैं इसलिए धनतेरस के दिन कांच के बर्तन या कांच की चीजें खरीदना अशुभ है। अगर बर्तन खरीदना ही है तो कांसा या पीतल के खरीदें।
नुकीली वस्तुएं- धनतेरस पर कभी भी नुकीली चीजें नहीं खरीदनी चाहिए। क्योंकि धनतेरस एक शुभ दिन है। इस दिन चाकू और कैंची या अन्य कोई भी नुकीली चीज नहीं खरीदनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ये वस्तुएं परिवार के लिए दुर्भाग्य लाती हैं और पारिवारिक क्लेश होता है। साथ ही घर परिवार में कंगाली छा जाती है।
7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.
