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होली से गुजिया का है खास कनेक्शन, जानें इस स्वादिष्ट पकवान का इतिहास

Written by:Diksha Bhanupriy
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होली के मौके पर गुजिया जैसा स्वादिष्ट व्यंजन जरूर बनाया जाता है। चलिए आज हम आपको इस मिठाई के इतिहास से रूबरू करवाते हैं।
होली से गुजिया का है खास कनेक्शन, जानें इस स्वादिष्ट पकवान का इतिहास

होली का त्योहार रंगों की मस्ती के साथ पकवानों की महक और स्वाद से भी जुड़ा हुआ है। इस त्यौहार के मौके पर अलग-अलग तरह के पकवान बनाए जाते हैं, जिनका लोग खूब आनंद लेते हैं। गुजिया भी एक ऐसे ही मिठाई है जिसे खूब पसंद किया जाता है।

खोया और ड्राई फ्रूट से भरी हुई गुजिया केवल मिठाई नहीं है बल्कि इसका संस्कृत से भी काफी गहरा जुड़ाव है। इतिहासकार इस मिठाई की शुरुआत को लेकर अलग अलग राय रखते हैं। चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं।

कब हुई गुजिया की शुरुआत

गुजिया मिठाई का सबसे पहले जिक्र 13वीं सदी में मिलता है। उसे समय इसे डीप फ्राई नहीं किया जाता था बल्कि गेहूं के आटे की लोईयों में गुड़ और शहद भरकर धूप में सुखाई जाती थी। यह आज के वजन की तुलना में सिंपल थी। इसे पहले वसंत की फसल के दौरान बनाया जाता था जो बाद में होली की परंपरा से मिल गई।

मिडल ईस्टर्न का हुआ असर

कुछ इतिहासकार यह भी बताते हैं की गुजिया पर मिडल ईस्टर्न के बकलावा जैसे डेजर्ट का असर है। इस डेजर्ट को आटे की पतली परतों पर ड्राई फ्रूट और स्वीटनर डालकर तैयार किया जाता है। कुछ जानकार ये कहते हैं कि इसमें ड्रायफ्रूट्स भरने का आईडिया ट्रेड रूट से भारत पहुंचा होगा। इसे समोसे के मीठे वर्जन से भी जोड़ा जाता है जो मिडल ईस्टर्न ओरिजिन का है।

मुगल काल में आया बदलाव

यह बताया जाता है कि 16वीं 17वीं शताब्दी में मुगल काल के दौरान गुजिया का रूप बदल गया। इसके अंदर खोया को चीनी और सुख मेवे के साथ स्टफिंग के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। डीप फ्राई कर इसे स्वादिष्ट तरीके से बनाया जाता था। कुछ जानकारी बताते हैं की गुजिया पूरी तरह से देसी है। पुराने समय में करने का नाम की एक मिठाई होने का जिक्र मिलता है जो ड्राई फ्रूट और शहद से भरी होती थी। इस तरह की तैयारी मॉडर्न गुजिया के लिए भी की जाती है।

होली से क्या है रिश्ता

गुजिया के होली से कनेक्शन की बात करें तो उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में होली के दौरान गुजिया काफी ज्यादा बनाई जाती हैं। ब्रज के क्षेत्र वृंदावन से भी इसका गहरा कनेक्शन है। यहां के राधा रमन मंदिर में सदियों से भगवान कृष्ण को गुजिया और चंद्रकला चढ़ाने की परंपरा है। होली राधा और कृष्ण के प्रेम से जुड़ी हुई है इसीलिए गुजिया भी त्यौहार का हिस्सा बन चुका है।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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