देवी अहिल्याबाई होलकर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पीक ऑवर्स के दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए एयरपोर्ट प्रबंधन ने एक अहम फैसला लिया है। टर्मिनल भवन में यात्रियों के लिए 200 अतिरिक्त सीटें लगाई जाएंगी, जिससे उन्हें फ्लाइट के इंतजार में बैठने की बेहतर सुविधा मिल सके। यह व्यवस्था अप्रैल 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।
बढ़ते यात्री यातायात के कारण मौजूदा सीटिंग व्यवस्था अपर्याप्त साबित हो रही थी, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है। प्रबंधन का मानना है कि इससे वेटिंग एरिया अधिक व्यवस्थित होगा और यात्रियों का अनुभव बेहतर बनेगा।
छोटे विमानों के लिए टर्मिनल-2 लगभग तैयार
एयरपोर्ट पर दबाव कम करने की रणनीति के तहत पुराने टर्मिनल भवन का नवीनीकरण किया जा रहा है। करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से 6,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में हो रहा यह काम अब अपने अंतिम चरण में है। इस टर्मिनल (टर्मिनल-2) के शुरू होने के बाद यहां से 72-सीटर एटीआर विमानों का संचालन किया जाएगा।
वर्तमान में इंदौर से रोजाना लगभग 100 उड़ानें संचालित होती हैं, जिनमें 36 एटीआर विमान शामिल हैं। इन छोटे विमानों को नए टर्मिनल पर शिफ्ट करने से मुख्य टर्मिनल पर भीड़ काफी कम हो जाएगी।
सालाना 50 लाख यात्रियों की होगी क्षमता
टर्मिनल-2 में यात्रियों की सुविधा के लिए 14 चेक-इन काउंटर, 3 बोर्डिंग गेट, 3 लाउंज और 2 कन्वेयर बेल्ट की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा फूड जोन और पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी। अधिकारियों के अनुसार, इन विस्तार कार्यों के पूरा होने के बाद एयरपोर्ट की वार्षिक यात्री क्षमता मौजूदा 40 लाख से बढ़कर 50 लाख हो जाएगी।
भविष्य की बड़ी योजना पर भी काम जारी
इंदौर एयरपोर्ट को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने की एक बड़ी योजना पर भी काम चल रहा है। इसके तहत 492 करोड़ रुपये की लागत से एक बिल्कुल नया और वृहद टर्मिनल बनाया जाएगा, जिसका क्षेत्रफल करीब 82,000 वर्ग मीटर होगा। इस नए टर्मिनल के निर्माण के बाद एयरपोर्ट की कुल क्षमता बढ़कर प्रतिवर्ष 1 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी।






