Fri, Jan 2, 2026

भागीरथपुरा में दूषित पानी बनता जा रहा आफत, सैकड़ों लोग बीमार, कई ICU में भर्ती

Written by:Bhawna Choubey
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इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली उल्टी-दस्त की बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है। नए साल की शुरुआत के साथ ही 338 नए मरीज सामने आए हैं। अस्पतालों पर दबाव बढ़ा, लोग डर और आक्रोश में हैं, प्रशासन अलर्ट मोड में है।
भागीरथपुरा में दूषित पानी बनता जा रहा आफत, सैकड़ों लोग बीमार, कई ICU में भर्ती

नए साल की शुरुआत जहां लोगों के लिए खुशी और उम्मीद लेकर आती है, वहीं इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में यह दिन डर और बीमारी के साए में गुजर रहा है। दूषित पानी के कारण फैल रही उल्टी-दस्त की बीमारी लगातार गंभीर होती जा रही है। गुरुवार को 338 नए मरीज सामने आने के बाद हालात और चिंताजनक हो गए हैं। सुबह से देर रात तक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

स्थिति यह है कि बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग कोई भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। कई घरों में एक-एक कर सभी सदस्य बीमार पड़ गए हैं। अब तक करीब 2800 मरीज सामने आ चुके हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि यह केवल एक सामान्य बीमारी नहीं, बल्कि एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है।

अस्पतालों पर बढ़ता दबाव

भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की हालत में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। गुरुवार तक 32 मरीजों को गंभीर हालत में ICU में भर्ती करना पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अभी अलग-अलग अस्पतालों में कुल 201 मरीज भर्ती हैं। इनमें से कई मरीजों को लगातार निगरानी में रखा गया है। अब तक 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जा चुका है, जिनमें से 71 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि अभी भी खतरा टला नहीं है। दूषित पानी का स्रोत पूरी तरह बंद और सुरक्षित होने तक नए मरीज सामने आते रह सकते हैं।

स्वास्थ्य केंद्रों में दिन-रात इलाज

भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। सुबह से लेकर देर रात तक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ बिना रुके काम कर रहे हैं। लगातार बढ़ती भीड़ के कारण कई बार मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को संभालने के लिए 21 विशेष टीमें बनाई हैं। इन टीमों में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। ये टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और जरूरी दवाइयां दे रही हैं।

घरों का सर्वे लोगों की जांच

बीमारी की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को व्यापक सर्वे अभियान चलाया गया। कुल 1714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 8571 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इस जांच में 338 नए मरीज मिले, जिन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सर्वे का मकसद बीमारी को शुरुआती स्तर पर पकड़ना है, ताकि हालात और न बिगड़ें। जिन लोगों में हल्के लक्षण पाए गए हैं, उन्हें घर पर ही दवा और सावधानियां बताई गई हैं।