होली का त्योहार नजदीक आते ही सबसे बड़ी चिंता होती है घर पहुंचने की। टिकट मिलेगी या नहीं? बसें चलेंगी या बंद रहेंगी? इस बार भी ऐसा ही माहौल बन गया था, जब इंदौर में बस हड़ताल की घोषणा ने हजारों यात्रियों की चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। सरकार और निजी बस संचालकों के बीच बनी सहमति के बाद हड़ताल टल गई है।
इस फैसले का सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। इंदौर से रोजाना चलने वाली करीब 1100 बसें अब होली के दौरान भी सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी। लगभग 40 हजार यात्री, जो रोज इन बसों से आसपास के जिलों और कस्बों तक सफर करते हैं, उन्हें अब त्योहार पर किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इंदौर में बस हड़ताल क्यों टली? समझिए पूरा मामला
मध्य प्रदेश में नई परिवहन नीति को लेकर पिछले कई दिनों से निजी बस संचालकों और सरकार के बीच खींचतान चल रही थी। बस मालिकों का कहना था कि नई व्यवस्था लागू होने से उनके मौजूदा परमिट खत्म हो सकते हैं और छोटे ऑपरेटरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।
राज्य परिवहन उपक्रम के नाम पर सात नई कंपनियां बनाने और पीपीपी मॉडल के तहत नए परमिट देने की तैयारी ने बस संचालकों को चिंतित कर दिया था। इसी विरोध के चलते 2 मार्च से अनिश्चितकालीन बस हड़ताल का ऐलान किया गया था।
लेकिन हाल ही में हुई बैठक में कई मुद्दों पर सहमति बन गई। सरकार ने 24 दिसंबर को जारी राजपत्र को फिलहाल रोकने का आश्वासन दिया। साथ ही फिटनेस सेंटर उपलब्ध न होने पर मैन्युअल फिटनेस की अनुमति और टैक्स व नामांतरण नियमों में बदलाव पर भी सकारात्मक संकेत दिए गए। इन फैसलों के बाद इंदौर में बस हड़ताल टाल दी गई।
होली पर 1100 बसें चलेंगी, यात्रियों के लिए क्या मायने?
होली जैसे बड़े त्योहार पर बसों का बंद होना हजारों परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता था। इंदौर से उज्जैन, देवास, धार, खंडवा, खरगोन, बड़वानी जैसे जिलों में रोज हजारों लोग सफर करते हैं।
अब जब इंदौर में बस हड़ताल टल गई है, तो त्योहार पर घर जाने वालों को राहत मिली है। छात्र, मजदूर, नौकरीपेशा लोग और छोटे व्यापारी सभी के लिए यह फैसला राहत भरा है।
बस संचालकों के अनुसार, त्योहार को देखते हुए अतिरिक्त फेरे भी लगाए जा सकते हैं। होली के पहले और बाद में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए व्यवस्थाएं मजबूत रखने की तैयारी की जा रही है।
नई परिवहन नीति पर क्या बनी सहमति?
नई परिवहन नीति को लेकर सबसे बड़ा विवाद परमिट व्यवस्था को लेकर था। बस मालिकों का कहना था कि पुराने परमिट खत्म कर नए टेंडर के जरिए परमिट देना छोटे और मध्यम ऑपरेटरों के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।
बैठक में सरकार और बस संचालकों के बीच कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी। तय हुआ कि 24 दिसंबर को जारी राजपत्र को फिलहाल रोक दिया जाएगा। जहां फिटनेस सेंटर उपलब्ध नहीं हैं, वहां बसों की मैन्युअल फिटनेस जांच की अनुमति दी जाएगी। साथ ही टैक्स और नामांतरण से जुड़े नियमों में सुधार करने पर भी सहमति बनी, जबकि मौजूदा बस संचालन व्यवस्था को अभी के लिए पहले की तरह ही जारी रखा जाएगा।
40 हजार यात्रियों को रोजाना राहत
इंदौर से रोजाना करीब 40 हजार यात्री निजी बसों से सफर करते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग बड़ी संख्या में शामिल हैं। अगर इंदौर में बस हड़ताल होती, तो इसका सीधा असर मजदूर वर्ग और छोटे व्यापारियों पर पड़ता।
होली के समय बाजारों में भीड़ बढ़ जाती है। लोग खरीदारी के लिए शहर आते हैं और फिर गांव लौटते हैं। बसें बंद होने से बाजार पर भी असर पड़ सकता था। अब जब हड़ताल टल गई है, तो व्यापार पर भी सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
बस संचालकों और सरकार के बीच भरोसे की नई शुरुआत
इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम बात यह रही कि मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार निगरानी की गई। परिवहन विभाग के अधिकारियों और बस संचालकों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।
बस मालिकों का कहना है कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना गया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि छोटे और मध्यम ऑपरेटरों के हितों की रक्षा की जाएगी। यही वजह है कि इंदौर में बस हड़ताल को टालने का फैसला लिया गया। यह फैसला सिर्फ एक हड़ताल टलने की खबर नहीं है, बल्कि यह सरकार और निजी क्षेत्र के बीच संवाद की ताकत को भी दिखाता है।






