इंदौर में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच ने तकनीकी जांच के आधार पर साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे 80 मोबाइल सिम कार्ड बंद करवा दिए हैं।
इसके साथ ही ऐसे 15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर भी ब्लॉक कराए गए हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर बार-बार साइबर अपराध की घटनाओं में किया जा रहा था।
NCRP पोर्टल की शिकायतों से खुला साइबर ठगी का नेटवर्क
इंदौर क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, देशभर में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इसके लिए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर उपलब्ध शिकायतों और डिजिटल साक्ष्यों की मदद ली गई।
जांच के दौरान पुलिस ने ऐसे मोबाइल नंबरों को चिन्हित किया, जिनका संबंध अलग-अलग साइबर ठगी की घटनाओं से सामने आया। कई मामलों में एक ही नंबर या डिवाइस का इस्तेमाल बार-बार संदिग्ध गतिविधियों के लिए होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाकर संबंधित एजेंसियों से संपर्क किया और कार्रवाई शुरू की।
साइबर ठगी में इस्तेमाल 80 सिम कार्ड कराए गए बंद
जांच के दौरान सामने आए संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जानकारी संबंधित दूरसंचार एजेंसियों के साथ साझा की गई। इसके बाद कार्रवाई करते हुए कुल 80 सिम कार्ड बंद करवा दिए गए।
पुलिस के मुताबिक, इन सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियों में होने की जानकारी मिली थी। साइबर ठग अक्सर लोगों को कॉल करने, फर्जी लिंक भेजने, बैंक अधिकारी बनकर बात करने या ऑनलाइन ऑफर के नाम पर फंसाने के लिए अलग-अलग नंबरों का इस्तेमाल करते हैं।
कई बार ठग एक नंबर का इस्तेमाल कुछ दिनों तक करते हैं और शिकायतें बढ़ने पर उसे बंद कर नया नंबर शुरू कर देते हैं। ऐसे मामलों में संदिग्ध नंबरों की समय पर पहचान कर उन्हें बंद कराना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई होती है।
15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर भी किए गए ब्लॉक
सिर्फ सिम कार्ड बंद कराने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही। इंदौर क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले 15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर भी ब्लॉक कराए हैं।
IMEI नंबर हर मोबाइल फोन की एक अलग पहचान होता है। इसे मोबाइल की डिजिटल पहचान भी कहा जा सकता है। जब किसी फोन का IMEI नंबर ब्लॉक हो जाता है, तो उस डिवाइस को मोबाइल नेटवर्क पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस की जांच में ऐसे मोबाइल डिवाइस सामने आए, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से बार-बार साइबर फ्रॉड की गतिविधियों में किया जा रहा था। तकनीकी जांच के बाद इन मोबाइल के IMEI नंबर ब्लॉक कराने की कार्रवाई की गई।
क्या है IMEI नंबर और क्यों है यह जरूरी?
हर मोबाइल फोन का एक यूनिक नंबर होता है, जिसे IMEI यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी कहा जाता है। यह नंबर फोन की अलग पहचान बनाता है।
जब कोई मोबाइल चोरी हो जाता है या किसी गंभीर अपराध में इस्तेमाल होता है, तब जांच एजेंसियां IMEI नंबर के जरिए उस डिवाइस को ट्रैक करने या ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।
इंदौर साइबर कार्रवाई में 15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर ब्लॉक कराए जाने का मतलब है कि पुलिस केवल नंबर बदलने वाले साइबर ठगों पर ही नहीं, बल्कि उनके इस्तेमाल किए जा रहे डिवाइस पर भी नजर रख रही है।
कैसे करते हैं साइबर ठग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल?
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी कई अलग-अलग तरीकों से लोगों तक पहुंचते हैं। कभी वे बैंक कर्मचारी बनकर फोन करते हैं तो कभी पुलिस, बिजली विभाग या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं।
कुछ मामलों में लोगों को कहा जाता है कि उनका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है। कहीं KYC अपडेट कराने के नाम पर लिंक भेजा जाता है। कई लोगों को नौकरी, लोन, इनाम या ऑनलाइन निवेश का लालच देकर ठगी की जाती है।
तकनीकी जांच से अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश
इंदौर क्राइम ब्रांच लगातार साइबर फ्रॉड के मामलों में तकनीकी जांच के जरिए अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। ऑनलाइन अपराधों में आरोपी कई राज्यों या शहरों से भी सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे में केवल स्थानीय स्तर पर जांच काफी नहीं होती।
NCRP जैसी व्यवस्था के जरिए अलग-अलग जगहों से दर्ज शिकायतों का विश्लेषण करने में मदद मिलती है। अगर किसी एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कई जगहों पर दर्ज ठगी की शिकायतों में सामने आता है, तो जांच एजेंसियां उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं।
इंदौर पुलिस की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन डिजिटल साधनों को बंद करना है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा है। इससे ठगों के नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिल सकती है।






