इंदौर में प्रस्तावित पूर्वी रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा गरमा गया है। अपनी सिंचित जमीनों को बचाने के लिए सोमवार को बड़ी संख्या में किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर आशीष सिंह स्वयं प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और उनके साथ जमीन पर बैठकर उनकी समस्याओं को सुना।
किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपनी उपजाऊ और सिंचित भूमि देने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि यही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। कड़ी धूप के बावजूद किसान अपनी मांगों को लेकर जमीन पर बैठे रहे।
क्यों हो रहा है भूमि अधिग्रहण का विरोध?
प्रदर्शन कर रहे किसानों की मुख्य आपत्ति परियोजना के लिए उनकी सिंचित भूमि के अधिग्रहण को लेकर है। किसानों का तर्क है कि प्रशासन को उपजाऊ कृषि भूमि के बजाय वैकल्पिक जमीन का चयन करना चाहिए। उनका कहना है कि प्रस्तावित सड़क के पास पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है, जिसका उपयोग किया जा सकता है। इसलिए, सड़क के अलाइनमेंट में बदलाव करके उनकी जमीनों को बचाया जाए। खुड़ैल क्षेत्र से आए एक किसान अपने सम्मान और प्रशस्ति पत्र लेकर पहुंचे थे, जो उनकी कृषि में उत्कृष्टता को दर्शाते हैं।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे हजारों की संख्या में ट्रैक्टर लेकर सड़कों पर उतरेंगे और एक बड़ा आंदोलन करेंगे।
एसडीएम लाए पानी, किसानों ने किया इनकार
विरोध प्रदर्शन के दौरान, एसडीएम अजय भूषण शुक्ल मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। वे अपने साथ पीने का पानी भी लेकर आए थे, लेकिन नाराज किसानों ने पानी पीने से इनकार कर दिया। किसान केवल कलेक्टर से सीधे बात करने की अपनी मांग पर अड़े रहे।
आखिरकार, कलेक्टर आशीष सिंह को खुद किसानों के बीच आना पड़ा। उन्होंने धैर्यपूर्वक किसानों की बात सुनी और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मामले की समीक्षा करने और वैकल्पिक मार्गों की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन के आश्वासन के बाद इस परियोजना की रूपरेखा में कोई बदलाव होता है या नहीं।






